मईल। देवरहा बाबा आश्रम में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान आचार्य विद्या भूषण ने कहा कि भक्त के प्रेम से वशीभूत होकर निर्गुण-निराकार परमात्मा सगुण-साकार रूप धारण करते हैं। उन्होंने कहा कि अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना के लिए भगवान समय-समय पर श्रीराम और श्रीकृष्ण के रूप में अवतरित हुए।
उन्होंने बताया कि हनुमान जी सप्त चिरंजीवियों में से एक हैं। जहां भी श्रीराम कथा या राम नाम का कीर्तन होता है, वहां वे उपस्थित होकर श्रद्धापूर्वक कथा का श्रवण करते हैं। उन्होंने श्रीराम को समस्त सद्गुणों का भंडार बताते हुए कहा कि लक्ष्मण विवेक, भरत वैराग्य और शत्रुघ्न सद्विचार के प्रतीक हैं।
कथा में आश्रम के पीठाधीश्वर श्याम सुंदर दास, बीडी शुक्ला, प्रमोद कुमार मिश्र, रत्नेश दास, संतोष कुमार, पवन पांडेय आदि मौजूद रहे। संवाद