बंधों पर बढ़ा दबाव, लगातार स्थिति हो रही भयावह
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले की चारों नदियां सरयू, राप्ती, गोर्रा, छोटी गंडक उफान पर हैं। इनके बंधों पर 18 से अधिक स्थानों पर रिसाव हो रहा है। नदियां बंधों पर दबाव बनाए हुए हैं। इससे बंधों के किनारे बसे लोग सहमे हुए हैं।
रुद्रपुर प्रतिनिधि के अनुसार, दोआबा और कछार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। गोर्रा और राप्ती नदी पर बने तटबंधों में 18 जगह रिसाव शुरू हो गया है। चारो ओर सीपेज खुलने से सिंचाई विभाग के अधिकारी हैरत में हैं।
दोआबा क्षेत्र के राप्ती नदी पर बने तिघरा मराछी तटबंध पर कई जगह तेज रिसाव शुरू हो गया है। करीब 17 किलोमीटर लंबे बांध पर तिघरा गांव के पास छह जगह रिसाव हो रहा है। इसी बांध पर हड़हा, सरांव, भेड़ी और मराछी गांव के पास रिसाव शुरू हो जाने से गांव के लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। गोर्रा नदी पर बने तटबंधो में भी जगह जगह रिसाव शुरू हो गया है। नदी 24 घंटे में 35 सेमी की रफ्तार से बढ़ रही नदी वर्ष 2017 और 2001 के रिकार्ड को तोड़ चुकी है। पिड़रा डीह चौराहे पर नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी सड़क को पार बह रहा है। सिंचाई विभाग बालू की बोरियां भर कर जलश्राव रोकने का प्रयास कर रहा है। यहां रतनपुर के पास रिसाव बढ़ने से दोआबा के 52 गांवों में कोहराम मच सकता है। गांव जलमग्न होने की आशंका में लोग घरों से सामान निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं। पिड़रा करनपुर बांध पर करीब चार जगह रिसाव होने से कछार के 64 गांवों के लोग दहशत में है। कई जगह जलस्तर उपर आने से पानी के बंधे से ओवर फ्लो होने की संभावना बनी है। शुक्रवार को गोर्रा नदी का जलस्तर 72.05 मीटर और राप्ती नदीं का जलस्तर 71.95 मीटर पर पहुंच गया। इस बाबत सिचाई विभाग के एक्सईएन नरेंद्र जाड़िया ने कहा कि बांध बचाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। विभाग के सभी अभियंता बंधो पर 24 घंटा कैंप कर रहे हैं।
बरहज प्रतिनिधि के अनुसार, सरयू की बाढ़ का पानी स्कूलों और गांवों में घुस गया है। जिससे लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। गोरखपुर जनपद के कोलखास के विस्थापित रामजानकी मार्ग पर टेंट डालकर जीवन-यापन करने पर विवश हैं। जिन्हें भोजन और पानी के लाले हैं। हालांकि नदी के जलस्तर में स्थिरता दर्ज किया गया है।
शुक्रवार को सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान 66.50 से एक मीटर 65 सेमी ऊपर 68.15 पर स्थिर रही। भदिला प्रथम गांव जलमग्न हो गया है। परसियां-विशुनपुर देवार के 26 टोले बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। बाढ़ के कारण मवेशियों को चारा का संकट गहरा गया है। लोग ऊंचे स्थानों पर ठिकाना तलाश रहे हैं। उग्रसेन सेतु के निकट कुछ बाढ़ पीड़ित टेंट डालकर जीवन यापन कर रहे हैं। अपनी व्यथा कहते हुए बाढ़ पीड़ितों के गले रुंध जा रहे हैं। कोलखास की फूलमती देवी, सुमन, राजेश, जगमोहन आदि का कहना है कि दिन तो कट जाता है। लेकिन रात भयावह हो जा रही है। नदी से पकड़ी गई मछली और भात खाकर नदी के पीछे हटने का इंतजार किया जा रहा है। नदी के उफनाने से कटइलवा, नौकाटोला, बेलडॉड, मठियां, कुवाईच टोला, रमईपुरा आदि गांवों में बाढ़ का पानी लगा हुआ है। नदी रामजानकी मार्ग और कपरवार-रुद्रपुर मार्ग पर दबाव बना रही है। कोरोना संकट के बाद स्कूल खुलने के बावजूद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बाढ़ से विशुनपुर देवार, रगरगंज में विद्यालयों में पानी भर गया है। सीआरओ अमृत लाल बिंद ने बाढ़ क्षेत्र का दौरा करने के बाद बताया कि हालात पर निरंतर नजर रखी जा रही है।
भदिला प्रथम के बाढ़ पीड़ितों में वितरित किया गया राहत सामग्री
बरहज। सरयू नदी में आए सैलाब से राप्ती नदी भी उफान पर है। नदी में बाढ़ आने के कारण पिछले एक माह से भदिला प्रथम गांव टापू बना हुआ है। बाढ़ को देखते हुए तहसील परिसर में सीआरओ अमृत लाल बिंद के नेतृत्व में करीब 95 बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री का पैकेट दिया गया। सीआरओ ने बाढ़ चौकियों का निरीक्षण करते हुए पीड़ित लोगों से आपातकालीन स्थिति में हेल्पलाइन 1077 पर संपर्क करने को कहा।
तटवर्ती इलाकों में घुसने लगा सरयू नदी का पानी
भागलपुर। सरयू नदी जल स्तर एक सप्ताह से खतरे के निशान से एक मीटर से भी अधिक पर बह रहा है। इससे दर्जनों गांव में नदी का पानी घुस कर लोगों को परेशानी में डाल दिया है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार नदी का जलस्तर शुक्रवार को शाम 4 बजे तुर्तीपार रेगुलेटर पर 65 मीटर 52 सेंटीमीटर दर्ज किया गया। जो खतरे के निशान 64 मीटर 30 सेंटीमीटर से 1 मीटर 22 सेंटीमीटर उपर है। तटवर्ती लोगों के लिए राहत की बात है कि नदी में 24घंटे में दो सेमी की बढ़ोतरी हुई है। शुक्रवार सुबह से स्थिर है। केंद्रीय जल आयोग के जे ई प्रकाश ओझा ने बताया कि नदी शुक्रवार दोपहर से स्थिर है। लेकिन पानी कम नहीं हुआ है। आगे अयोध्या व बहराइच केजल आयोग सेंटरों पर अभी पानी कम नहीं हो रहा है। आगे भी नदी के बढ़ने के आसार हैं।
रतजगा कर बंधों की निगरानी कर रहे लोग
1998 की बाढ़ देख चुके लोग सहमे-सहमे से हैं
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। वर्ष 1998 की विनाशलीला देख चुके दोआबा और कछार के लोगों की आंखों में भयानक मंजर का खौफ साफ दिख रहा है। राप्ती और गोर्रा के जलस्तर के खतरे के निशान के एक मीटर ऊपर जाने के बाद से ही कछार और दोआबा के 116 गांवों के लोग सहमे हुए हैं। गांव वाले रतजगा कर बांध पर पहरा दे रहे हैं। विनाशलीला की आशंका में ये लोग गांव छोड़ कर बंधो पर पॉलिथीन तान कर रह रहे हैं।
वर्ष 1998 की बाढ़ के गवाह रहे शिवप्रताप सिंह ने कहा कि नदी का जलस्तर अपने पुराने रिकॉर्ड को तोड़ चुका है। बांध की ऊंचाई बढ़ने से पानी बांध के कुछ इंच नीचे है। बांध टूटा तो दोआबा के 52 गांवों में पानी का सैलाब उमड़ जाएगा। रामशब्द सिंह ने कहा कि कछार वासियों पर बहुत बड़ा संकट मंडरा है। तीन बार की बाढ़ ने दोआबा के किसानों की कमर तोड़ दी है। इस बार यदि बांध कटा तो कछार के लोग कही के नहीं रहेंगे। सरिता देवी और शीला देवी ने कहा कि नदी का पानी देखकर बहुत भय लग रहा है। सबसे बड़ी चिंता पशुओं की है। पशुओं को चारा का संकट उत्पन्न हो गया है। बांध पर पॉलिथीन तान कर गुजर करने की नौबत आ गई है। देवानंद सिंह ने कहा कि सिंचाई विभाग की लापरवाही से कछारवासियों के सिर पर संकट आया है। बंधों पर वर्ष 98 के बाद एक खांची मिट्टी भी नहीं पड़ी। सारे बंधे सलसला(पानी से भींग) गए हैं। सीताराम यादव ने कहा कि बंधों पर पेड़ लगाकर वन विभाग बांध को कमजोर कर रहा है। जहां पेड़ लगे है, वहां तेज रिसाव हो रहा है। गांव की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
‘बांध कटा तो अभियंता पर होगी कार्रवाई’
राज्यमंत्री जयप्रकाश ने कटान स्थलों का निरीक्षण, चीफ इंजीनियर को बंधों की ऊंचाई बढ़ाने को भी कहा
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। क्षेत्र में बाढ़ का संकट गहराने के बाद शुक्रवार को राज्यमंत्री जयप्रकाश निषाद ने सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर के साथ कटान व संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण किए। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को बांध बचाने के लिए निर्देश भी दिया। कहा, बांध कटा तो संबंधित अभियंता जिम्मेदार होंगे। उन पर कार्रवाई भी होगी।
राज्यमंत्री ने प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीम के साथ राप्ती और गोर्रा नदी पर बने करीब 60 किलोमीटर बांध का निरीक्षण किया। पांडेयमाझा राजधर बंधे से होकर करौता और सिलहटा के कटान स्थल पर बचाव कार्य को देखा। रतनपुर में रिसाव के कारण बिगड़ी स्थिति का जायजा लेने के बाद राज्यमंत्री तिघरा मराछी बांध पर तिघरा, हड़हा, सरांव, भेड़ी और मराछी में हो रहे रिसाव स्थल पर पहुंच कर बचाव कार्य का निरीक्षण किए। उन्होंने कहा कि नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से बांध पर दबाव बन रहा है। बावजूद इसके रुद्रपुर क्षेत्र के अब तक सभी बांध सुरक्षित हैं। तिघरा मराछी बांध को पिच करा देने यह बांध के लिए कवच का काम कर रही है। रिसाव स्थलों पर दिनरात बचाव कार्य हो रहा है। राज्यमंत्री ने सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता को बांधो की ऊंचाई और चौड़ाई बढ़ाने के लिए त्वरित कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यदि बांध कटा तो संबंधित अभियंता का नपना तय है। कछार और दोआबा के चार लाख लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग और स्थानीय प्रशासन की है। उन्होंने एसडीएम से हर बंधों पर निगरानी टीम बनाकर गश्त कराने को कहा। इस अवसर पर मुख्य अभियंता आलोक जैन, एसडीएम संजीव कुमार उपाध्याय,एक्सइएन नरेंद्र जाड़िया, एसडीओ रविशंकर यादव, संगमधर दूबे, जितेंद्र गुप्ता, रामसंतोष शुक्ल, अतुल सिंह, देवेंद्र सिंह, धीरज तिवारी आदि मौजूद रहे।
बाढ़ पीड़ितों में बांटी गई राहत सामग्री, तौल में वजन निकला कम
संवाद न्यूज एजेंसी
मईल(देवरिया)। तेलिया कला महाविद्यालय में मऊ जनपद के बाढ़ प्रभावित लोगों में कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान के प्रतिनिधि शिवप्रसाद उपाध्याय उर्फ सुग्गी बाबा ने शुक्रवार को राहत सामग्री का वितरण किया। सरयू नदी में आई बाढ़ ने मऊ जनपद के मधुबन थाना के मुसाडोही गांव के लोगों में तबाही मचा दिया है। बाढ़ से बचने के लिए मऊ जनपद के प्रशासन ने देवरिया जनपद के श्रीराम महाविद्यालय तेलियां कला में सुरक्षित रहने का शरणस्थली बनाया है। यहां 400 लोगों में खाद्य व दैनिक जरूरत का सामान वितरण किया। इस दौरान लेखपाल अवनीश, अभिषेक सिंह, ग्राम प्रधान ललन प्रसाद, नन्दलाल यादव आदि लोग उपस्थित रहे। लोगों ने मंत्री प्रतिनिधि से शिकायत किया कि राहत सामग्री की कीट के वजन में कमी है। जिस पर प्रतिनिधि ने अपने सामने वजन कराया। जिसमें दो से तीन किलोग्राम की कमी पाई गई। इस संबंध में उन्होंने डीएम से शिकायत की।