करीब दो साल पूर्व पट्टीदारी के चार युवकों से डेढ़-डेढ़ लाख रुपये एम्स में नौकरी लगाने के लिए ले लिए थे। छह माह तक नौकरी नहीं लगी तो रुपये वापस कर दिए। दंपती के जेल जाने के बाद गांव वालों को जब सच्चाई का पता चला तो लोग हैरान हो गए।
सबका यही कहना था कि उसने पिता की कमाई इज्जत मिट्टी में मिला दी। साथ ही गांव की भी बदनामी हो रही है। बरहज सीओ राजेश सिंह ने बताया कि गोरखपुर में दंपती पर गैंगस्टर की कार्रवाई हुई थी। घर से पुलिस टीम गिरफ्तार कर ले गई। काफी छानबीन कराई गई। ठगी का कोई स्थानीय मामला सामने नहीं आ रहा है। वैसे इसका पता पुलिस लगा रही है।
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गांव में बड़ा बनने का था शौक, छठ पूजा में जलाए थे 25 हजार के पटाखे
राजीव जब गांव आता था तो उसके दरवाजे पर गांव के अधिकांश युवकों का जमावड़ा होता था। दावतों का दौर चलता था और काजू कतली भी खिलाता था। छठ पर्व पर अपने परिवार के साथ गांव पर आया था। गांव वालों ने बताया कि छठ पूजा के दिन 25 हजार का पटाखा राजीव ने फोड़ा। उसे गांव में बड़ा बनने का शौक था।
गांव में किसी जरूरत मंद की शादी विवाह में आर्थिक मदद भी करता था। ठगी के पेशे से गांव में कई जगह जमीन भी बैनामा कराई है। बताया कि पिता की ससुराल सिवान जिले के लद्दी शराणी गांव में है। वहां पर नेवासा मिला है। वहां भी इसकी अच्छी खासी जमीन है। इसके अलावा कई शहरों में घर होने की बात गांव वालों ने कही।
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देवरिया जिले की रहने वाली शिप्रा तिवारी गोरखपुर से पॉलीटेक्निक की पढ़ाई करने के बाद दिल्ली में आईएएस की तैयारी करने गई थी। राजीव और शिप्रा के बीच वहीं पर नजदीकियां बढ़ीं और घर वालों तक यह मामला पहुंचा। देवरिया से ही दोनों की शादी घरवालों ने कराई। शिप्रा का मायका लार के नैनी डैनी गांव में है। लेकिन घर वाले देवरिया में मकान का निर्माण करा रहते हैं।
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राजीव तिवारी ने गांव से गोरखपुर तक ऐसा भौकाल बनाया कि लोगों को यह विश्वास हो गया कि वह नौकरी दिला सकता है। गांव के एक युवक ने राजीव का फेसबुक अकाउंट दिखाया। इसपर उसने गोरखपुर के एक दरोगा और कई सफेदपोशों के साथ फोटो डाल रखी है। गांव वालों ने बताया कि गोरखपुर में तैनात दरोगा राजीव का काफी करीबी है। वह कई बार गांव तक इसके साथ आया है। गोरखपुर जाने पर भी इसके आवास पर उसका आना जाना था।