चीनी मिल बंद होने के बाद नहीं हुआ भुगतान, लगातार 11 वर्षों से धरना-प्रदर्शन कर रहे किसान
- देवरिया सदर के पूर्व विधायक के नेतृत्व में आगे की रणनीति बनाने में जुटे किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
गौरी बाजार/बखरा। तीन दशक से बंद पड़ी गौरीबाजार चीनी मिल पर बकाए के भुगतान के लिए 11 वर्षों से किसान धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। रविवार को देवरिया सदर के पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा के नेतृत्व में हुए धरना में क्षेत्र के किसानों और चीनी मिल के श्रमिकों ने मिल प्रबंधन एवं प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप लगाते हए आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी।
गौरीबाजार चीनी मिल परिसर स्थित शिव मंदिर के प्रांगण में रविवार को आयोजित धरना को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा ने कहा कि गौरी बाजार चीनी मिल 8 मार्च 1996 को एक साजिश के तहत अनिश्चितकालीन ब्रेकडाउन के बाद बंद कर दी गई। इस मिल पर किसानों एवं श्रमिकों का करीब 14 करोड़ से अधिक का बकाया है।
श्रमिक नेता ऋषिकेश यादव ने कहा कि बकाए के भुगतान के लिए किसान तथा मिल श्रमिक लगातार संघर्ष कर रहे हैं। श्रमिक नेता कपिल देव यादव ने कहा कि वर्ष 2011 में यह चीनी मिल मात्र 17.25 करोड़ मेंं राजेंद्रा इस्पात प्राइवेट लिमिटेड कोलकाता के हाथों बेच दी गई।
तेज प्रताप जायसवाल ने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देश पर उप श्रमायुक्त गोरखपुर ने दो बार क्रमशः 14.2 करोड़ तथा 13.4 करोड़ की आरसी जारी कर प्रशासन को चीनी मिल की जमीन बेचकर किसानों तथा मिल श्रमिकों के बकाए भुगतान के निर्देश दिए थे, मगर मिल प्रबंधन एवं प्रशासनिक मिलीभगत से आरसी जारी होने के बावजूद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस दौरान वीरेंद्र यादव, रामाज्ञा, हंसराज, राम सकल यादव, शंकर प्रजापति, अदालत अली, रामचंद्र गुप्ता, मोहन निषाद, शहाबुद्दीन, सुगिया देवी, चंपा देवी, इसरावती आदि मौजूद रहीं।