उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर, अमर उजाला की टीम ने देवरिया पहुंचकर चुनावी सरगर्मी का जायजा लिया। इस दौरान टीम ने स्थानीय निवासियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याओं, अपेक्षाओं और चुनावी मुद्दों को समझने का प्रयास किया। शहर की गलियों से लेकर गांवों तक, जनता के मन की बात जानने के लिए यह पड़ताल की गई, ताकि जमीनी हकीकत को सटीक तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जा सके।
चिकित्सा और मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में देवरिया को क्या हुआ हासिल?
किस तरह एक मेडिकल कॉलेज बदलाव एक माध्यम बन सकता है? इस बात को समझने के लिए हमारी टीम महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज पहुंची। मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य रजनी पटेल ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में अलग-अलग विभाग होते हैं, जिससे विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार मिलता है। इससे पहले तक लोग इस काम के लिए गोरखपुर जाते थे। इसके अलावा यहां 100 एमबीबीएस सीटें सरकार द्वारा निर्धारित हैं। एक मेडिकल कॉलेज से केवल चिकित्सकीय सुविधाएं नहीं मिलती हैं, बल्कि इसके अलावा शहर के ग्रोथ को भी आगे बढ़ता है। एमबीबीएस के छात्र अभिषेक सिंह ने बताया कि देवरिया में अगर मेडिकल कॉलेज न होता तो काफी दूर जाना पड़ता। पढ़ाई बहुत अच्छी है। सारी सुविधाएं हैं।
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सरकारी योजनाओं से कितनी बदली पथरदेवा की तस्वीर?
अमर उजाला की टीम ने जमीनी हकीकत जानने के लिए देवरिया के पथरदेवा नगर पंचायत का दौरा किया, जहां स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से बातचीत में विकास की तस्वीर सामने आई। नगर पंचायत अध्यक्ष कमलेश ने बताया कि पथरदेवा अब आदर्श नगर पंचायत के रूप में विकसित हो चुका है। राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से लोगों को सीधा लाभ मिला है और बीते दस वर्षों में यहां उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां सड़कों की हालत खराब थी और जगह-जगह गड्ढे थे, वहीं अब अच्छी और सुगम सड़कें बन चुकी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़ा सुधार हुआ है। अब देवरिया में ही मेडिकल कॉलेज उपलब्ध है, जिससे इलाज के लिए लोगों को गोरखपुर नहीं जाना पड़ता।
वहीं, स्थानीय निवासी हरिश कुमार शाही का कहना है कि क्षेत्र में अधिकतर विकास कार्य वर्ष 2017 के बाद ही हुए हैं। सड़क, महाविद्यालय और आईटीआई जैसे कई क्षेत्रों में तेजी से काम हुआ है। एक अन्य निवासी विनोद कुमार ने बताया कि अब क्षेत्र में कॉलेज और अस्पताल की व्यवस्थाएं काफी बेहतर हो गई हैं। लगभग हर घर में शौचालय की सुविधा है और अस्पतालों में 24 घंटे डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है।
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स्थानीय रोजगार का कितना बढ़ा दायरा?
इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए हम देवरिया पेपर मिल पहुंचे। पेपर मिल के मालिक संजय सिंह ने बताया कि उनकी क्राफ्ट पेपर की यूनिट है। जिसकी क्षमता 200 टीपीडी प्रतिदिन की है। हम नेपाल एक्सपोर्ट करते हैं। नेपाल में लोकल इंडस्ट्री लगने के कारण अब वहां नहीं जा रहा है। अब हम लोकल बाजार में माल भेज रहे हैं। अब हमारा माल तेजी से और आसानी से पहुंच रहा है। लॉ एंड ऑर्डर बहुत अच्छा है। पेपर मिल के कर्मचारी कुलदीप सिंह ने बताया पहले कच्चा माल पीसते हैं। इसके बाद उसे साफ करते हैं। इसके बाद उसे धोया जाता फिर उसे मशीन पर लाया जाता है।
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