वर्ष 2012 में पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र सृजित हुआ। उसके बाद सूर्यप्रताप शाही कसया क्षेत्र बदल कर पथरदेवा से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े, जहां उन्हें सपा के शाकिर अली ने हरा दिया। 2017 के चुनाव में सूर्यप्रताप शाही चुनाव जीतकर कृषि मंत्री बने। उधर जयप्रकाश निषाद चौथी बार रुद्रपुर से विजयश्री हासिल कर भाजपा का परचम लहराने में सफल रहे हैं। जयप्रकाश पहली बार रामलहर में 1991 में विधायक बने। 1996 में दोबारा और 2017 में तीसरी बार विधायक बने। इस बार चुनाव में उन्हें कमजोर माना जा रहा था, लेकिन मोदी एवं योगी लहर में उनकी नैया रुद्रपुर में पार हो गई।
कम मत पाकर भी फिर बाजी मार ले गए सूर्यप्रताप शाही
कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही राजनीति के कुशल खिलाड़ी माने जाते हैं। वर्ष 2012 में पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े, जहां उन्हें 55351 मत मिले थे। सपा के पूर्व मंत्री शाकिर अली ने उन्हें चुनाव हरा दिया। वर्ष 2017 में सूर्यप्रताप शाही ने 99812 मत प्राप्त कर शाकिर अली को चुनाव हरा दिया। इस बार शाही को पिछले चुनाव की तुलना में भले ही कम वोट मिले हैं, लेकिन उन्होंने इस क्षेत्र से लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने में वह कामयाब रहे।
सभाकुंवर ने पहली बार भाटपाररानी में खिलाया कमल
भाटपाररानी विधानसभा क्षेत्र में पहली बार कमल खिलाने का गौरव सभाकुंवर को मिला है। कई बार अलग-अलग दलों से विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमाने वाले सभाकुंवर की पहचान संघर्षशील नेता के रूप में रही है। वर्ष 1951 से 2017 तक के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत पाए। पिछले बीस वर्ष से इस सीट पर उपाध्याय परिवार का कब्जा था।
कामेश्वर उपाध्याय निर्दल 1985 में चुनाव जीते। उसके बाद वर्ष 2002 से वर्ष 2012 तक लगातार उन्हें जीत मिली। उनके निधन के बाद उनके पुत्र आशुतोष ने वर्ष 2013 के उप चुनाव में जीत हासिल की। हालांकि उनका ग्राफ दिन प्रतिदिन गिरता गया। पिता की मौत के बाद उप चुनाव में जहां उन्हें 73100 वोट मिले थे, वहीं वर्ष 2017 के चुनाव में 61 हजार 862 मतों से ही संतोष करना पड़ा। इस बार वह अधिक वोट पाने के बावजूद चुनाव हार गए।