सुनील कुमार सिंह
देवरिया। अखिलेश सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में इस बार भी जिले के सपाइयों को निराशा लगी। सत्ताधारी दल के पांच विधायकों वाले जिले में कोई भी मंत्री नहीं है। यहां के दो विधायक पूर्व कैबिनेट मंत्री हैं तो एक पूर्व कैबिनेट मंत्री के बेटे हैं।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में पथरदेवा, रामपुर कारखाना, बरहज, सलेमपुर और भाटपाररानी सीट से क्रमश: सपा के शाकिर अली, गजाला लारी, प्रेमप्रकाश सिंह, मनबोध प्रसाद और कामेश्वर उपाध्याय विधायक बने। देवरिया और रुद्रपुर में पार्टी प्रत्याशियों को हार मिली थी।
अखिलेश यादव की अगुवाई में बनी पूर्ण बहुमत की सरकार में भाटपाररानी के विधायक कामेश्वर उपाध्याय कैबिनेट मंत्री बनाए गए थे। कुछ महीने बाद उनका निधन हो गया। रिक्त सीट पर हुए उपचुनाव में उनके बेटे डॉ. आशुतोष उपाध्याय विधायक बने। पथरदेवा विधायक शाकिर अली और बरहज विधायक प्रेमप्रकाश सिंह पूर्व की सरकारों में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। जब भी मंत्रिमंडल के विस्तार की सुगबुगाहट शुरू होती है तो शाकिर का नाम उछलता है, लेकिन निराशा ही हाथ लगती है।
ऐसा ही कुछ इस बार भी हुआ। हालांकि जिले के कई विधायकों को उम्मीद थी कि चुनावी मौसम में सीएम जिले को तवज्जो देंगे और किसी न किसी की मंत्री पद पर ताजपोशी करेंगे। ऐसी चर्चा है कि शाकिर को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिलने के पीछे पुरानी घटनाएं तो हैं ही साथ में सरकार के दो कद्दावर मंत्री उन्हें पसंद नहीं करते। प्रेमप्रकाश के बारे कहा जा रहा है कि जनता के बीच उनकी छवि ठीक नहीं है। हाल-फिलहाल में उत्तराखंड के एक मामले ने उनकी छवि पर और दाग लगा दी। गजाला लारी कैबिनेट मंत्री शिवपाल की खास मानी जाती हैं।
फिर भी मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिलना अचरज की बात है। कहा तो ये जा रहा है कि सीएम अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल यादव के बीच बढ़ी खटास के कारण गजाला को लालबत्ती नसीब नहीं हुई। पूर्वमंत्री के बेटे डॉ. आशुतोष उपाध्याय राजनीति में नये हैं। पिता के निधन के कारण रिक्त हुई सीट पर हुए उपचुनाव में उन्हें विजय मिली है।
सलेमपुर के विधायक मनबोध प्रसाद दलित हैं और पहली बार विधानसभा में पहुंचे हैं। देवरिया जनपद से इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार में भी काफी लाबिंग की गई थी लेकिन जिले के किसी भी कद्दावर सपा नेता की दाल नहीं गली।