पवन कुमार मिश्र
देवरिया। यूपी समेत 18 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेेशों में सांसद निधि से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति बाहुल्य इलाकों के विकास में कोताही बरती जा रही है। केंद्र सरकार की लोक लेखा समिति की रिपोर्ट में खुलासा के बाद प्रदेश सरकार से सांसद निधि के निर्धारण, क्रियान्वयन, कार्यों का विवरण मांगा गया है।
शासन देवरिया समेत सभी जिलों से चार माह से ब्योरा मांग रहा है लेकिन अधिकारियों की सेहत पर फर्क नहीं पड़ रहा है। नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव ने अधिकारियों के इस रवैये पर नाराजगी जताते हुए एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगा है।
प्रमुख सचिव मुकुल सिंघल ने 22 सितंबर को डीएम को पत्र भेजकर कहा है कि शासन की ओर से बार-बार याद दिलाने के बाद भी सूचना उपलब्ध नहीं कराना खेदजनक है। भारत सरकार के निदेशक एमपी लैड्स ने प्रदेश के नियोजन विभाग को अवगत कराया था कि 16वीं लोकसभा की लोक लेखा समिति की 31वीं रिपोर्ट, जो 15वीं लोकसभा की लोक लेखा समिति की 55वीं रिपोर्ट में दिए गए परीक्षण, संस्तुतियों पर सरकार की ओर से लिए गए एक्शन टेकन पर आधारित है।
इन जातियों के निवास क्षेत्रों के विकास के लिए सांसद निधि से 22.5 फीसदी धन खर्च करने का प्राविधान होने के बावजूद महज 14 फीसदी ही धन स्वीकृत हुए हैं। समिति ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति निवास क्षेत्रों के लिए सांसद निधि के निर्धारण, क्रियान्वयन, एवं पूर्ण किए गए कार्यों का समग्र ब्योरा मांगा है।
प्रमुख सचिव के पहले नियोजन विभाग के विशेष सचिव नवीन चंद्र त्रिपाठी ने भी दो जून और 12 जुलाई को पत्र लिखा था। परियोजना निदेशक रविशंकर राय ने बताया कि शासन को रिपोर्ट भेजने की तैयारी है। जल्द ही रिपोर्ट भेज दी जाएगी।