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दलाल ने पहुंचाया निजी अस्पताल, इलाज के अभाव में महिला की मौत, पांच डाक्टरों पर मुकदमा दर्ज

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दलाल ने पहुंचाया निजी अस्पताल, इलाज के अभाव में महिला की मौत, पांच डाक्टरों पर मुकदमा दर्ज
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देवरिया। जिला महिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती गर्भवती को बृहस्पतिवार को महिला दलाल ने बेहतर इलाज का झांसा दिया और शहर के निजी अस्पताल में लेकर चली गई। वहां प्रसव के बाद इलाज के अभाव में महिला की मौत हो गई। ससुर की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने निजी अस्पताल के पांच डाक्टरों और एक महिला दलाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। निजी अस्पताल कर्मी मौके से फरार हो गए।
तरकुलवा थाना क्षेत्र के मलघोट विरैचा गांव निवासी अरुण यादव पथरदेवा ब्लॉक में सफाईकर्मी के पद पर तैनात है। उनकी गर्भवती पत्नी रागनी (30) को परिजनों ने बृहस्पतिवार को जिला महिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया। शाम को दर्द होने पर परिजन परेशान हो गए। इसी दौरान एक महिला दलाल पहुंच गई। उसने शहर के भटवलिया चौराहे के पास स्थित अस्पताल के डाक्टरों से दस हजार रुपये में इलाज के लिए मोबाइल फोन पर बात की। गर्भवती के परिजन महिला दलाल के झांसे में आ गए और उसको निजी अस्पताल में भर्ती करा दिए। देर शाम रागनी को लड़का पैदा हुआ, लेकिन रक्तस्राव अधिक होने के कारण महिला की हालत नाजुक हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के कर्मियों ने मौत होने के बाद एंबुलेंस से शहर के एक निजी अस्पताल में भेज दिया। वहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। महिला के ससुर सूर्य नारायण यादव ने कोतवाली पुलिस को नामजद तहरीर देकर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। पुलिस ने इस मामले में डॉ. आरके राय, डॉ. एसएन सिंह, डॉ. विनिता सिंह, डॉ. एसबी सिंह, डॉ. कुलदीप सिंह और महिला दलाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। कोतवाल अनुज कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी फरार हैं। दबिश दी जा रही है।
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मासूमों के सिर से उठ गया मां का साया
रागनी को तीसरा बच्चा पैदा हुआ है। बच्चा तो सकुशल है, लेकिन मां अब इस दुनिया में नहीं रही। मां की मौत के बाद बड़ी बेटी चार साल की श्रेया और ढाई वर्ष का बेटा प्रियांशु का रो-रो कर बुरा हाल है। परिवार में कोहराम मच गया है।
निजी अस्पतालों में दलालों का बोलबाला, लालच में जा रही जान
देवरिया। जिला महिला अस्पताल परिसर और आसपास निजी अस्पतालों की महिला दलाल हर समय डेरा जमाए रहती हैं। ग्रामीण इलाकों सेे आने वाली महिलाओं की सहायता कर उन्हें अपने जाल में फंसाकर निजी अस्पतालों में पहुंचा देती हैं। कई बार इलाज के अभाव में प्रसूता की मौत हो चुकी है। इन घटनाओं के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार सजग नहीं हो रहे हैं।
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रागनी की मौत के पहले भी कई प्रसूताओं की जान जा चुकी है। कुछ निजी अस्पताल संचालक सरकारी अस्पताल से अपने अस्पताल में मरीज ले आने के लिए कमीशन देते हैं। इस खेल में कुछ एंबुलेंस चालक और आशाएं भी हैं। उनकी निजी अस्पतालों से साठगांठ है।
इस संबंध में सीएमएस डॉ. अल्पना रानी का कहना है कि मरीज को कोई दिक्कत हुई होगी, तो रेफर किया गया होगा। मौत की जानकारी हमें नहीं है।
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