पांच लाख के बदले पंद्रह लाख का लालच देकर ठग गिरोह का पर्दाफाश
देवरिया। अंतरजनपदीय ठगी करने वाले एक गिरोह का शनिवार को पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह ने पांच लाख के बदले पंद्रह लाख रुपये देने का लालच देकर एक व्यक्ति झांसे में लिया था। लेकिन, सीओ श्रीयश त्रिपाठी के बुने जाल में गिरोह के तीन सदस्य फंस गए। एसपी ने पर्दाफाश करने वाली टीम को पांच हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है।
एसपी डॉ. श्रीपति मिश्र ने पुलिस लाइंस में प्रेसवार्ता में बताया कि नवाज शरीफ निवासी-विशुनपुर चिरकिहवां थाना रामपुर कारखाना के पास तीन दिन से अनजाने व्यक्ति फोन पर कह रहे थे कि उनके पास 100 रुपये के बहुत ज्यादा नोट हैं। अगर वह पांच और दो हजार रुपये के नोट देगा तो उसे एक लाख के बदले तीन लाख रुपये देगा। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया। क्षेत्राधिकारी नगर श्रीयश त्रिपाठी ने ठग गिरोह को पकड़ने के लिए प्लान बनाया। उन्होंने एसओजी प्रभारी अनिल कुमार यादव और एसओ अनिल कुमार के नेतृत्व में टीम बनाई। पुलिस के प्लान के मुुताबिक, वादी ने पांच लाख रुपये के बदले 15 लाख रुपये की मांग की। इस पर ठग तैयार हो गए। सुबह ठगों को रुपये देने के लिए रामपुर कारखाना क्षेत्र के पटनवापुल के पास से बुलाया गया। अगल-बगल पुलिस की टीम मौजूद थी। इसी दौरान एक गत्ता लेकर तीन शातिर ठग वादी के पास पहुंचे तो पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपी की पहचान इमरान अंसारी निवासी पचरुखिया घाट थाना पटहेरवा जनपद कुशीनगर, अंकित प्रजापति चौराडीह थाना पटहेरवा जनपद कुशीनगर, लतीफ निवासी चौरादरी पटहेरवा के रुप में हुई। पुलिस ने इनके पास से एक बड़ा गत्ता, 32 हजार रुपये और पिस्टल बरामद की।
इस तरह करते थे ठगी
देवरिया। गिरोह के सदस्य देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज और अन्य जनपदों में जाते थे। जहां पर दुकानों पर टंगे साइनबोर्ड का फोटो खिंच कर गिरोह के सरगना लतीफ के पास भेज देते थे। इसके बाद लतीफ दुकानदार के पास फोन करता था कि उसके पास बड़ी मात्रा में 100-100 रुपये के नोट हैं। वह बदलना चाहता है। अगर कोई लाख देगा तो वह उसे पांच लाख रुपये देगा। झांसे में आए लोगों के पास गिरोह एक गत्ता लेकर पहुंच था। उसमें सात, आठ असली नोट रखी रहताी थी, बाकी नोट नकली रहती थी। अगर कोई गत्ते की नोट देखने के लिए कहता था तो ऐसे जगह पर ब्लेड मार कर दिखाते थे, जहां से 100 और 200 रुपये की असली नोट दिखती थी। इस पर लोगों को विश्वास हो जाता था और लाखों रुपये की ठगी कर फरार हो जाते थे।
टीम में ये भी शामिल रहे
देवरिया। ठगों के इस गिरोह के सदस्यों को पकड़ने वाली टीम में एसओजी के दरोगा गोपाल राजभर, सादिक परवेज, दरोगा मुन्नीलाल, मुख्य आरक्षी शशिकांत राय, योगेंद्र प्रसाद, प्रशांत शर्मा मेराज खान, विमलेश सिंह शामिल रहे।