डीएम के आदेश के बावजूद कुछ ही बीईओ को जांच में मिल रहे ऐसे विद्यालय
16 ब्लॉकों में 500 से अधिक बिना मान्यता के चल रहे स्कूल, कुछ प्रबंधक पांचवीं तक की मान्यता लेकर चला रहे आठवीं तक कक्षाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। विभिन्न ब्लॉकों के खंड शिक्षाधिकारी अपने यहां संचालित बिना मान्यता के स्कूलों को चिह्नित करने में ही पिछड़ जा रहे हैं। डीएम ने 14 अप्रैल को आदेश जारी कर सख्त आदेश दिया है कि अगर उनके क्षेत्र में कहीं स्कूल चलते पाए गए तो इसके लिए जिम्मेदार बीईओ होंगे।
बैतालपुर, तरकुलवा को छोड़ दिया जाए तो अन्य बीईओ को बिना मान्यता वाले स्कूल खोजने पर या तो मिल नहीं रहे हैं या उनकी ओर से कुछ खास प्रयास नहीं किया जा रहा है। लापरवाही का परिणाम है कि कुछ जगहों पर तो पांचवीं की मान्यता लेकर कक्षा आठवीं तक कक्षाएं चलाई जा रही हैं।
जनपद के 16 ब्लॉकों में 500 से अधिक ऐसे विद्यालय हैं, जिनके प्रबंधक बिना मान्यता की शर्तों को पूरा किए ही इसका संचालन कर रहे हैं। किसी की मान्यता तीन से चार साल पहले ही समाप्त हो चुकी है। लेकिन, बीआरसी के कुछ कर्मचारियों की मेहरबानी से उनके विद्यालय संचालन पर कोई रोक नहीं लग पा रही है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे विद्यालयों की भरमार है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे विद्यालयों की संख्या भी लगातार बढ़ी है।
ऐसे स्कूल संचालक छात्रों के अभिभावकों से शुल्क, ड्रेस, कापी-किताब, स्टेशनरी टाई-बेल्ट के नाम पर मनमाना दाम वसूलते हैं। इसकी शिकायत भी जिले के कई अभिभावकों व शिक्षक संगठनों ने मुख्यमंत्री पोर्टल के अलावा जिला स्तरीय अधिकारियों से भी की है। उधर, बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े लोग बताते हैं कि इन स्कूलों के संचालन से परिषदीय स्कूलों में नामांकन संख्या बढ़ नहीं पा रही है। जबकि नए सत्र से नामांकन बढ़ाने को लेकर प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों पर इस बार दबाव ज्यादा है। वह यह कहते हैं कि जब बिना डर भय के बिना मान्यता वाले धड़ल्ले से परिषदीय स्कूल के आसपास ही चल रहे हैं। इससे अभिभावक अपने पाल्यों के नामांकन को लेकर भ्रम में रहेंगे ही, नामांकन बढ़ाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
पांचवीं की मान्यता लेकर आठवीं तक चला रहे थे कक्षाएं
तीन दिन पूर्व बीईओ बैतालपुर जयराम पाल ने अपने क्षेत्र में एक ऐसे विद्यालय को पकड़ा था जिसकी मान्यता कक्षा पांच तक थी, लेकिन वह आठवीं तक कक्षा संचालित करा रहे थे।
खंड शिक्षाधिकारियों की तय होगी जिम्मेदारी
डीएम ने निर्देश दिए हैं कि सभी खंड शिक्षाधिकारी समस्त ब्लॉकों में सघन जांच अभियान चलाएं। यदि कोई विद्यालय बिना मान्यता के संचालित हो रहा है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई करें। अगर उनके क्षेत्र में कोई भी विद्यालय बिना मान्यता के संचालित होते पाया गया तो उस क्षेत्र के बीईओ के विरुद्ध भी कार्रवाई होगी।
उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि जिलाधिकारी के आदेश के बाद कुछ जगहों पर ही बिना मान्यता के चल रहे विद्यालयों को विभाग बंद कराने में सफल रहा। लेकिन सभी विकास खंडों में यह जांच अभियान नहीं चल रहा है। इससे बिना मान्यता के चल रहे विद्यालयों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। इसका सीधा असर परिषदीय स्कूलों के नामांकन पर पड़ रहा है।
बीईओ देवरिया सदर व नगर क्षेत्र देवमुनि वर्मा ने कहा कि देवरिया सदर व नगर क्षेत्र में बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों को चिह्नित किया जा रहा है। शीघ्र ही इनके खिलाफ अभियान चलाकर इन्हें नोटिस दिया जाएगा। नहीं मानने पर विभागीय नियमों के अनुसार इन पर कार्रवाई होगी।
जूनियर शिक्षण प्रबंधक संघ की जिलाध्यक्ष संगीता सिंह ने कहा कि संगठन के अपने सभी सदस्यों को स्कूल संचालन के लिए मान्यता नियमों का पालन करने के लिए कहा है। जांच के दौरान बीईओ व मान्यता के नाम पर विभागीय कर्मचारी प्रबंधकों का उत्पीड़न करते हैं। संगठन इसके खिलाफ आवाज उठाता रहेगा।
कोट
बिना मान्यता के चल रहे विद्यालयों की जांच के लिए टीम का गठन कर दिया गया है। नियमानुसार पहले इन विद्यालयों को नोटिस दिया जाता है। दो नोटिस के बाद भी स्कूल संचालन की स्थिति में तीसरे नोटिस के बाद एफआईआर की कार्रवाई की जाएगी। सभी बीईओ को इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। अगर कोई विद्यालय सीलबंद होने के बाद चलाएगा तो उस पर एक लाख जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
-शालिनी श्रीवास्तव, बीएसए