जिलाधिकारी आवास के पीछे नजूल की भूमि को खाली कराकर बनाए गए सरकारी आवास
कैबिनेट के फैसले के बाद तीन कार्यालयों में खंगाला जा रहा रिकॉर्ड
शहर में 25 से अधिक नजूल की जमीन पर है अवैध कब्जा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर में बेशकीमती नजूल की जमीन पर हलचल तेज हो गई है। जिन लोगों ने अवैध तरीके से सरकारी जमीन पर कब्जा किया है, उनकी धड़कनें बढ़ गई हैं। 25 से अधिक ऐसे लोग हैं, जिन्हें नजूल की जमीन से हटाया जाना तय हो गया है। प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में नजूल की जमीन पर स्वामित्व का अधिकार वापस लेने के निर्णय के बाद पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। प्रशासन ने कार्रवाई करने की तैयारी कर ली है।
शहर में नजूल की जमीन पर कुछ लोगों ने पट्टा अवधि समाप्त होने के बाद भी कब्जा जमाया है तो कुछ लोगों ने जमीन पर फर्जीवाड़ा करके अपना नाम भी दर्ज करा लिया है। अवैध तरीके से कब्जा की गई सरकारी जमीन पर कहीं मॉल और स्कूल संचालित हो रहे हैं तो कहीं मकानों ने दुकान के रूप में आकार ले लिया है। पट्टा ली गई नजूल की जमीन पर शर्तों के अनुसार कार्य नहीं होने भी स्वामित्व छिना जाना तय है।
शहर में नजूल की जमीन पर पहले भी कार्रवाई की गई है। यही कारण रहा कि नगर पालिका परिषद में नजूल जमीन से संबंधित रजिस्टर गायब हो गया था। अब जो रजिस्टर बना है, उसकी सत्यता की जांच के लिए 1880 के सरकारी रिकॉर्ड खंगालने की आवश्यकता है। नगर पालिका में करीब 40 लोगों का पट्टा हुआ है, जिसमें 16 लोगों के पट्टे का नवीनीकरण नहीं हुआ है। इस कारण इन लोगों का कब्जे हटाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
एक कर्मचारी ने बताया कि शहर में 25 से अधिक लोगों की नजूल की जमीन हटाया जाना तय है। जिला पंचायत कार्यालय की ओर से भी नजूल की जमीन का पट्टा किया गया है। जबकि मुख्य राजस्व अधिकारी कार्यालय में सात लोगों को पट्टाधारक बताया जा रहा है। हालांकि, अब नए सिरे से रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। नगर पालिका ने जिन जमीन का पट्टा किया है, उनमें अधिकतर प्लाॅटों की कीमत करोड़ों में है। सबसे बेशकीमती जमीन कोतवाली चौराहा, रागिनी मोड़, मालवीय रोड ओवरब्रिज के समीप, टाउनहाल, भुजौली काॅलोनी में है।
99 साल का हुआ था पट्टा
देवरिया। 90 साल पूर्व नगर पालिका ने जिन जमीन का पट्टा किया, वह उस जमीन को अपनी संपत्ति मान बैठे हैं। वर्ष 1912 से 1928 के बीच नगर पालिका ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में नजूल की भूमि का पट्टा किया है। कुछ जमीन 90 साल तो कुछ का 99 साल के लिए आवंटन किया गया है। पट्टा आवंटनों की अवधि वर्ष 2011 से 18 तक पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद पट्टा धारक नजूल की भूमि पर कब्जा जमाए हुए हैं।
नगर पालिका की ओर से अब तक करीब 83 गाटा आवंटियों को नोटिस जारी किया गया है। कब्जा हटवाने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सर्वाधिक गाटा का आवंटन गरुलपार व बास देवरिया में किया गया है। इसके अलावा भरौली बाजार, मेहड़ा, देवरिया खास, बांस देवरिया आदि जगहों पर नजूल की भूमि पट्टे पर दी गई है।
नजूल की जमीन से हटवाया था कब्जा
शहर में 2018-20 के बीच तत्कालीन जिलाधिकारी अमित किशोर ने जिलाधिकारी आवास के पीछे नजूल की जमीन पर बसे 200 लोगों को हटवाया था। उन्होंने वर्षों से वहां रहने का दावा करते हुए सरकारी रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन उसी दौरान अभियान शुरू हो गया। उसी स्थान पर सरकारी आवास बना दिए गए हैं।
यह कहते हैं अधिकारी
नगर पालिका परिषद में सभी पट्टाधारकों के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। जिन लोगों ने पट्टा का नवीनीकरण नहीं कराया है, उन्हें नोटिस भेजा जाएगा। उनकी बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।
-अंकिता शुक्ला, ईओ, नगर पालिका परिषद
जिला पंचायत कार्यालय से नजूल की जमीन का पट्टा हुआ है। पट्टा बहुत पहले हुआ है। पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। अवैध रूप से नजूल की जमीन पर रहने वालों को चिह्नित कर बेदखली की कार्रवाई शुरू होगी।
-उज्ज्वल अंबेस, अपर विकास अधिकारी, जिला पंचायत
कोट
शहर में 50 से अधिक नजूल की जमीन का आवंटन हुआ है। इनके रिकॉर्ड की जांच कराई जा रही है। अनुमान के अनुसार करीब 25 लोगों के पास वैध कागजात नहीं होंगे। ऐसी जमीन को चिह्नित की जा रही है। सरकारी अध्यादेश के अनुपालन में कार्रवाई की जाएगी।
-अखंड प्रताप सिंह, जिलाधिकारी