संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। सलेमपुर तहसील का महाल मंझरिया गांव का रकबा सबसे बड़ा है। गांव के पास से गुजरी सरयू नदी दो पाट में बंटी है। बीच के करीब 13 हजार एकड़ जमीन पर तटवर्ती गांव के अलावा बलिया व बिहार प्रांत के सिवान जिले के किसान गेहूं की खेती करते हैं।
नदी में पानी बढ़ने के चलते उनकी फसल की मड़ाई नहीं हो पाती है। किसानों की मांग पर सरयू नदी पर पीपा पुल बनाने की स्वीकृति मिल गई है। पीडब्ल्यूडी विभाग के अफसरों से सर्वे कर लिया है। इसके प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई है। नदी मेंं पानी सामान्य होने के बाद पीपा का पुल लगाया जाएगा। इससे गेहूं की खेती के साथ गन्ने की फसल भी लहलहाएगी।
भागलपुर से निकली सरयू नदी पिंडी, महाल मंझरिया, कौसड़, खेमादेई, चुरिया, नदौली, करचो, मेहरौना होते हुए दो पाट में बहती है। सलेमपुर तहसील के लार ब्लॉक के 20 गांवों के किसान नदी के दोनों पाट के बीच वाले करीब 13 हजार एकड़ जमीन पर खेती करते हैं। इसमें बलिया जिले के डुहा, विहरा, कठौड़ी और बिहार के सिवान जिले के ग्यासपुर, मइरीटाल, डुमरहर आदि गांव के किसान भी शामिल हैं।
संसाधन व सुविधा नहीं मिलने के कारण सिर्फ गेहूं की फसल बोते हैं, मगर मड़ाई के समय नदी में पानी बढ़ने पर कंबाइन और ट्रैक्टर-ट्राॅली उस पार नहीं पहुंच पाता है। इसके चलते कभी-कभी गेहूं की फसल बर्बाद हो जाती है और किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ता है। इसको लेकर किसान कई बार आंदोलन कर चुके हैं और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से भी मांग की थी।
शासन ने इसका संज्ञान लिया और सरयू नदी पर नदौली गांव के सामने पीपा का पुल बनाने के लिए स्थान चिन्हित किया। अब गेहूं की फसल की मड़ाई करने और नदी उस पार से इस पार लाने में किसानों को सहूलियत होगा। इसके अलावा बलिया जिले और सिवान जिले के तटवर्ती गांव के किसानों को भी इस रास्ते दियरा क्षेत्र में आने-जाने में आसानी होगी। पीपा पुल लग जाने से किसान गेहूं के साथ गन्ने की खेती भी करेंगे और जमीन उपयोगी होगी, क्यों कि नदी दो पाट में होने के कारण जो स्थान है वह काफी ऊंचा है, नदी में पानी बढ़ने के बाद भी वहां तक नहीं पहुंच पाता है। इस पहल से दियारा की जमीन की कीमत बढ़ जाएगी और यह जमीन उपयोगी होगी।