देवरिया। खुखुंदू थाने के लॉकअप में हुई मौत से पहले भी पुलिस की लापरवाही सामने आ चुकी है। मई 2024 में बरहज थाना क्षेत्र के सतरांव गांव निवासी दद्दन यादव की मौत के मामले में तत्कालीन चौकी प्रभारी वीरेंद्र कुशवाहा समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर हत्या के आरोप में प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
आरोप था कि पुलिस दद्दन को सतरांव चौराहे से पकड़कर चौकी ले गई और वहां पूछताछ के दौरान उसकी पिटाई की गई। हालत बिगड़ने के बाद उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले ने तूल पकड़ा तो तत्कालीन एसपी संकल्प शर्मा ने चौकी प्रभारी को हटा दिया था।
बताया जा रहा है कि दद्दन यादव 20 मई 2024 की शाम सतरांव चौराहे पर गए थे। इसी दौरान पुलिस उन्हें पकड़कर चौकी ले गई। परिजन का आरोप था कि चौकी प्रभारी वीरेंद्र कुशवाहा और पुलिसकर्मियों ने उनकी पिटाई की थी।
हालत बिगड़ने पर दद्दन को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। 21 मई की देर शाम इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। पत्नी ने पुलिस की पिटाई से मौत का आरोप लगाते हुए चौकी प्रभारी और तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत की थी। इसके बाद प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे।
मामले में तत्कालीन चौकी प्रभारी वीरेंद्र कुशवाहा समेत चार लोगों पर गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इसके बावजूद कई दिनों तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से मामला फिर गरमाया। जून 2024 में समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए आंदोलन की रणनीति बनाई।
17 जून को सतरांव में अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ। इस दौरान पांच थानों की पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर तैनात रही।
धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी चौकी प्रभारी रहे वीरेंद्र कुशवाहा और उनके तीन साथियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे।
18 जून को प्रशासन के आश्वासन पर धरना समाप्त किया गया। सपा नेताओं ने डीएम को संबोधित चार सूत्री ज्ञापन एसडीएम को सौंपा और मांगें पूरी नहीं होने पर दोबारा आंदोलन की चेतावनी दी थी।