देवरिया। अफसरों को धोखे में रखकर जाति प्रमाण पत्र जारी कराने वाले ग्राम प्रधान का प्रमाण पत्र जांच में गलत पाया गया। अभिलेखों में कूटरचित कर फर्जीवाड़ा करने वाले ग्राम प्रधान की कुर्सी छिन जाएगी।
भटनी ब्लॉक के जिगिना मिश्र गांव में 2015 में ग्राम पंचायत चुनाव में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित था। गांव के कमकर जाति के बैजनाथ अफसरों की आंखों में धूल झोंककर दस्तावेज में हेराफेरी कर अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण-पत्र सलेमपुर तहसील से जारी करा लिया। चुनाव में उनकी जीत हुई। नौ माह पहले गांव के कृष्णमोहन मिश्र ने जाति प्रमाण पत्र फर्जी जारी कराने की शिकायत डीएम से की। डीएम के निर्देश पर समाज कल्याण अधिकारी को जांच मिला। उन्होंने सलेमपुर तहसीलदार से जाति प्रमाण-पत्र की रिपोर्ट मांगी। तहसीलदार की जांच में पाया गया कि ग्राम प्रधान बैजनाथ ‘कमकर’ जाति का है। कागज में हेराफेरी कर खरवार बताते हुए अनुसूचित जनजाति का प्रमाण-पत्र जारी कराया है। रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने जाति प्रमाण-पत्र को निरस्त कर दिया। इससे प्रधान की कुर्सी खतरे में पड़ गई है। जाति प्रमाण-पत्र जारी करने वाले अफसरों की गर्दन भी फंस सकती है। समाज कल्याण अधिकारी दीनानाथ शुक्ला ने बताया कि जांच में प्रधान का जाति प्रमाण-पत्र फर्जी पाया गया। निरस्त कर दिया गया है, विभागीय कार्रवाई की जाएगी।