दो आयुर्वेदिक अस्पतालों को मिलेगा भवन
स्वास्थ्य कर्मियों, मरीजों को रही थी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जनपद में आयुर्वेदिक अस्पतालों के दिन बहुरने लगे हैं। दो आयुर्वेदिक अस्पतालों को नए भवन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए धन आवंटित कर दिया गया है। आयुर्वेदिक अस्पताल बकरुआ एवं रामचक को भवन निर्माण के लिए करीब तीस लाख रुपये स्वीकृत कर दिए गए हैं। भवन बनने से दवा के भंडारण एवं मरीजों व स्वास्थ्य कर्मियों को सहूलियत होगी।
कोरोना महामारी के समय आयुर्वेद पद्धति को लोगों ने अपनाया। सरकार भी आयुर्वेद को बढ़ावा देने में जुट गई। जनपद में 42 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। इसमें कुछ के पास अपना भवन है तो अधिकांश पंचायत भवन, किराए के भवन तथा न्यू पीएचसी, सीएचसी में चल रहे हैं। इनमें से एक दर्जन से अधिक अस्पतालों के लिए प्रशासन ने भूमि उपलब्ध कराया है। वहीं, आयुर्वेदिक अस्पताल रामचक तथा बकरुआ का भवन जर्जर हो गया है। रामचक अस्पताल सामुदायिक भवन में संचालित हो रहा है। यहां योग वेेलनेस सेंटर खोलने की भी स्वीकृति मिली है, लेकिन भवन के अभाव में इसे शुरू नहीं किया जा सका है। दोनों अस्पतालों के भवन निर्माण के लिए काफी दिनों से प्रयास चल रहा था। कुछ दिन पहले शासन ने इन अस्पतालों के भवन निर्माण के लिए हरी झंडी देते हुए प्रत्येक के लिए पंद्रह-पंद्रह लाख रुपये आवंटित कर दिया। हालांकि, अभी तक कार्यदायी संस्था नामित नहीं हो सकी है, जिससे निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। भवन होने से अस्पताल के कर्मचारियों तथा दवा भंडारण में दिक्कत नहीं होगी। वहीं मरीजों को भी सहूलियत होगी।
इन अस्पतालों को मिली भूमि, धन का इंतजार
देवरिया। जनपद में संचालित करीब एक दर्जन आयुर्वेदिक अस्पतालों को प्रशासन की ओर से भूमि उपलब्ध करा दी गई। इसमें आयुर्वेदिक अस्पताल भटनी, रामपुर प्रतापपुर, जगदीशपुर, शहर का 25 शैय्या अस्पताल, मरहवा, बैरौना, श्रीनगर, खेमादेई, बरडीहा, तरकुलहां, मछैला, पलिया, भोसिमपुर शामिल हैं। जिले में स्थापित ये अस्पताल किराए के भवन तथा पंचायत भवन में चल रहे हैं। भूमि मिलने के बाद इन अस्पतालों के भवन के लिए अब धन का इंतजार है।
कोट
जनपद में स्थापित बकरुआ तथा रामचक अस्पताल के भवन निर्माण के लिए धन आवंटित हो गया है। कार्यदायी संस्था नामित होने के बाद कार्य शुरू हो जाएगा। कुछ आयुर्वेदिक अस्पतालों के लिए भूमि उपलब्ध करा दी है। भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया है।
-डॉ. दिनेश कुमार चौरसिया, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी