एसडीएम न्यायालय मेजा में पांच साल से चल रहे हदबंदी के मुकदमे में 60 बार तारीख लगी, लेकिन फैसला नहीं हो सका। सोमवार को 61वीं तारीख पर खेत में ही अदालत लगी और सुलह-समझौते के आधार पर फैसला लिया गया। फैसले से दोनों पक्षों ने संतुष्टि जताई। बताया जा रहा है कि तय तारीख पर मुकदमे की सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट अमित गुप्ता मोटी फाइल देखकर हैरान रह गए।
उन्होंने दोनों पक्षों से कहा कि अब इस मामले का निर्णय कोर्ट में नहीं मौके पर पहुंचकर लेंगे। इसके बाद राजस्वकर्मियों सहित दोनों पक्षों की मौजूदगी में पहुंचे एसडीएम ने दोनों पक्षों की बात सुनी और फैसला सुनाया। यह तय हुआ कि दो दिन बाद राजस्वकर्मियों की मौजूदगी में मेड़बंदी कर जमीन का सीमांकन कर दिया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
मेजा तहसील के बसकंडी गांव निवासी वंशराज और तौलन राम के बीच 23 बिस्वा भूमि को लेकर विवाद था। वंशराज ने एसडीएम न्यायालय में 2018 में हदबंदी का वाद दाखिल किया था। मुकदमे में पांच साल में 60 बार तारीख लगी, लेकिन निस्तारण नहीं हो सका। इस दौरान मुकदमे की पत्रावली भी मोटी होती गई। 61वीं तारीख पर मुकदमे की सुनवाई हुई मोटी फाइल देखकर एसडीएम ने कहा कि अब कोर्ट में नहीं, बल्कि मौके पर चलकर फैसला सुनाऊंगा।ट
सोमवार को दोनों पक्षों के साथ एसडीएम गांव पहुंच गए। वहां दोनों पक्षों की बात सुनीं और सुलह-समझौते के आधार पर अपना फैसला सुनाया। दोनों पक्षों ने एसडीएम के फैसले पर संतुष्ट जताई। एसडीएम अमित गुप्ता ने बताया कि दो दिन बाद राजस्वकर्मियों की मौजूदगी में संबंधित भूमि की मेड़बंदी की जाएगी। खेत में अदालत लगाकर हुआ फैसला क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा। लोगों का कहना रहा कि ऐसे ही फैसला सुनाया जाए तो न्यायालय में लंबित मुकदमों का निस्तारण होने में देर नहीं लगेगी।