फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी में दागियों को गले लगाने में कोई पार्टी पीछे नहीं

Tue, 16 Jul 2013 01:49 AM IST
अखिलेश वाजपेयी
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश में सिर्फ सपा ही क्यों, सूबे का शायद ही कोई ऐसा प्रमुख राजनीतिक दल हो जिसमें दागी चेहरे न हों। संख्या कम ज्यादा हो सकती है और उन पर लगे आरोपों का आकार-प्रकार अलग-अलग हो सकता है।
विज्ञापन


पर, कोई प्रमुख दल खुद के पाक-साफ होने का दावा करने की स्थिति में नहीं है। प्रदेश मंत्रिमंडल में शामिल नगीना (बिजनौर) के मनोज पारस हों या बसपा सरकार में ग्राम्य विकास मंत्री रहे दद्दू प्रसाद, किसी की छवि बेदाग नहीं कही जा सकती।

यूपी इलेक्शन वॉच के मुताबिक इस मामले में भाजपा का भी ट्रैक रिकार्ड बहुत अच्छा नहीं है। पार्टी के 47 विधायकों में 14 के खिलाफ कोई न कोई मामला दर्ज है। कांग्रेस के 13 विधायकों पर भी आपराधिक मामले दर्ज है।
विज्ञापन


अलग-अलग पार्टियों में कपिल मुनि करवरिया, बाल कुमार पटेल, मोहम्मद अदीब, मुनकाद अली, सलीम अंसारी, प्रो. एसपी सिंह बघेल, गंगा चरन राजपूत, जुगुल किशोर, अवतार सिंह करीमपुरी, नरेंन्द्र कुमार कश्यप, बृजलाल खबरी  जैसे नेताओं के खिलाफ भी कोई न कोई मामला दर्ज है।

बसपा व सपा में मुकाबला :
सपा से उन्नाव में लोकसभा के उम्मीदवार अरुण कुमार शुक्ला ‘अन्ना’ के खिलाफ कई मामले हैं। सपा से कैसरगंज से प्रत्याशी बृजभूषण सिंह का चेहरा भी ऐसा ही है। सपा विधायक अभय सिंह का नाम भी ऐसे ही चेहरों में शामिल है।

माफिया से राजनेता बने सांसद धनंजय सिंह भी इसी श्रेणी में आते हैं। सिंह को बसपा ने जौनपुर से लोकसभा का उम्मीदवार बनाया है। जेलर आरके तिवारी हत्याकांड में आरोपी संजीव द्विवेदी उर्फ रामू द्विवेदी हों या बसपा के ही दूसरे एमएलसी विनीत सिंह, इन सबकी छवि दागी ही है।

ऐसी ही छवि के जितेंद्र सिंह ‘बबलू’ पहले बसपा से विधायक थे। अब लोकसभा के प्रत्याशी हैं। सपा एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह के खिलाफ कई आरोप हैं। उन पर पंचायत चुनाव के दौरान विपक्षियों पर जानलेवा हमला कर हिंसा फैलाने का आरोप है।

उन्हें इस मामले में जेल की हवा भी खानी पड़ी। अक्षय प्रताप पर कई मुकदमे दर्ज हैं। वाराणसी के पिंडरा से कांग्रेस के विधायक अजय राय की भी छवि खराब है।

पार्टी नहीं फिर भी किसी से कम नहीं :
भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के आरोप में जेल में बंद मुख्तार अंसारी की लंबी हिस्ट्रीशीट है। विहिप के पदाधिकारी नंद किशोर रूंगटा के अपहरण और हत्या के आरोप में भी मुख्तार का नाम आया था।

मुख्तार की पूर्वांचल के अपराध जगत और रेलवे व खनन के ठेकों में पैठ की जानकारी पुलिस को है। वह इस समय अपनी पार्टी कौमी एकता दल से विधायक हैं। स्नातक क्षेत्र से एमएलसी एसपी सिंह भी हत्या कराने के आरोप में जेल में हैं।

दागी चेहरों की चकाचौंध
बाबू सिंह कुशवाहा
बाबू सिंह कुशवाहा एनआरएचएम घोटाले में जेल में बंद हैं लेकिन उनका परिवार शनिवार को सपा में शामिल हो गया। तकनीकी रूप से भले ही कुशवाहा सपा में न आए हों लेकिन अब शायद ही किसी को इसमें संदेह हो कि सपा व कुशवाहा के बीच कनेक्शन हो गया है। सपा में कुशवाहा के कुनबे के जरिये उन्हें सत्तारूढ़ दल की छाया मिल गई है।
मित्रसेन यादव
मित्रसेन यादव को सपा ने फैजाबाद से लोकसभा का प्रत्याशी बनाया है। मित्रसेन इस समय फैजाबाद की बीकापुर सीट से सपा के विधायक हैं। उनके खिलाफ 36 मामले दर्ज हैं जिनमें 14 हत्या के हैं। उनके पुत्र पिछली बसपा सरकार में विधायक रहे आनंद सेन इस समय फैजाबाद की ही छात्रा शशि के अपहरण व हत्या के मामले में जेल में हैं।
सोनू सिंह
सुल्तानपुर के हिस्ट्रीशीटर चंद्रभद्र सिंह उर्फ सोनू सिंह भगवा चोला पहन चुके हैं। सोनू सिंह के भाई यशभद्र सिंह उर्फ मोनू सिंह पर भी कई आरोप हैं। संत ज्ञानेश्वर की फरवरी 2006 में हत्या के षड्यंत्र के आरोपी सोनू सिंह की लंबी हिस्ट्रीशीट है। सोनू सिंह पहले सपा से दो बार विधायक रह चुके हैं। सपा के बाद वह बसपा से जुड़े। विधानसभा का पिछला चुनाव वह पीस पार्टी से लड़े।
गुड्डू पंडित
भगवान शर्मा ऊर्फ गुड्डू पंडित की छवि के बारे में सभी को पता है। बसपा में थे तो सपा के स्थानीय लोगों ने बुलंदशहर व डिबाई में गुड़्डू पंडित के खिलाफ आंदोलन किया। सदन में भी हंगामा किया। पर, वही गुड्डू पंडित इस समय सपा से विधायक हैं। सिर्फ वही नहीं उनके भाई भी विधायक हैं। गुड्डू की पत्नी काजल शर्मा को भी पहले लोकसभा प्रत्याशी बनाया गया था लेकिन अब टिकट कट गया है।
शाहनवाज राना
मुजफ्फरनगर के शाहनवाज राना पिछली बार बसपा से विधायक थे। अब विधायक नहीं हैं लेकिन सपा में हैं। राना के नजदीकी पर जब दिल्ली की छात्राओं से दुराचार की कोशिश का आरोप लगा तो सपा कई दिन तक इस मुद्दे पर तत्कालीन सरकार के खिलाफ हमलावर रही थी। सपा के लोगों ने वहां एक दिन का बंद भी कराया था।  खूब धरना-प्रदर्शन हुआ। राना इस बार लोकदल से लड़े और हार गए। बाद में सपा से  संपर्क साधा। सपा ने सब कुछ भूलते हुए मुख्यमंत्री की मौजूदगी में उन्हें गले लगा लिया।
अलीम खान
मायावती ने दुष्कर्म के आरोपी नेताओं और विधायकों के टिकट काट दिए लेकिन उनके ऑपरेशन क्लीन से अलीम खान बच गए। वह  टिकट हासिल करने में कामयाब रहे। उन पर सर्कस की महिला कर्मचारियों से यौन शोषण करने का आरोप था। पुलिस ने सर्कस में बंधक बना कर रखी गई महिला कर्मचारियों को रिहा कराया था। पर, अलीम खान को बसपा ने टिकट दिया और वह चुनाव भी जीत गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें