उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री आजम खां को कोर्ट ने राहत दे दी है। उनके खिलाफ अजीमनगर थाने में दर्ज मारपीट के मामले को वापस लेने की हरी झंडी दे दी है। आजम के खिलाफ अभी तीन और मामले कोर्ट में वापसी के लिए विचाराधीन हैं, जिन पर अभी फैसला आना बाकी है।
यूपी सरकार ने सपाइयों के खिलाफ बसपा शासन में राजनैतिक द्वेष के चलते दर्ज मुकदमों को वापस लेने का फैसला लिया है। इसी के तहत नगर विकास मंत्री के खिलाफ रामपुर में चार केसों को वापस लेने की कवायद की जा रही है। इसी क्रम में अजीमनगर थाने में दर्ज मामला भी है।
अजीमनगर थाने में वर्ष 2007 में आलियागंज निवासी अबरार ने नगर विकास मंत्री के साथ ही शाहवेज खां पर मारपीट का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस दोनों के खिलाफ चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल कर दी थी, जिस पर सुनवाई भी चल रही थी। सरकार के फैसले के बाद इस केस को भी वापस लेने की कवायद की गई। कई तारीखों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने इस मुकदमे को वापस लेने की हरी झंडी दे दी है।
27 दिसंबर, 2012 के आदेश के तहत एपीओ शैला शमी ने न्यायिक मजिस्ट्रेट आजाद सिंह की कोर्ट में वाद वापसी का प्रार्थना पत्र दिया था, जिस पर दो जनवरी को बहस हुई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कैबिनेट मंत्री और अन्य पर दर्ज मुकदमा सम्मनीय प्रकृति का है। लिहाजा वाद वापस लिए जाने की अनुमति दी जाती है।
इन मुकदमों में अभी फैसला आना बाकी
1-टांडा थाना-वर्ष 2007 में चुनावी जनसभा में भड़काऊ भाषण देकर मुख्यमंत्री को जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने का आरोप।
2-कोतवाली-वर्ष 2007 में पांच सौ सिलाई मशीन और चार सौ कंबल वितरण में धांधली और सरकारी धन का दुरुपयोग करने का आरोप।
3-अजीमनगर-वर्ष 2007 में लोक सड़क, पुल, नदी अथवा नाव्य जल सरणी को क्षति पहुंचना।