भाजपा के वरिष्ठ नेता और दिल्ली में पार्टी के मुख्यमंत्री के दावेदार डॉ. हर्षवर्धन का कहना है कि दिल्ली में पार्टी को पूर्ण बहुमत न मिलने और किसी दल का समर्थन प्राप्त न होने के कारण वह सरकार नहीं बना सके, लेकिन लोकसभा के चुनाव में ‘आप’ हो या कांग्रेस, सबका बैंड बजेगा। यह बातें मंगलवार को कानपुर प्रवास के दौरान उन्होंने ‘अमर उजाला’ से कहीं।
मंगलवार को दिल्ली से बांदा जाते समय डॉ. नीलम मिश्र के आवास पर ठहरे डॉ. हर्षवर्धन ने एक सवाल के जवाब में कहा कि दिल्ली में सरकार तब बनाते, जब कोई दल समर्थन देता।
कोई भी दल भाजपा को समर्थन देने को राजी नहीं था। इस कारण विपक्ष में बैठने का फैसला किया। दोबारा चुनाव होते हैं तो पार्टी को दिल्ली में ही पचास से अधिक सीटें हासिल होंगी। जब उनसे पूछा गया कि दोबारा चुनाव होने पर अरबों रुपये का बोझ जनता पर फिर पड़ेगा तो बोले, इसके लिए न तो मैं जिम्मेदार हूं और न ही मेरी पार्टी।
चुनाव के पहले जनता से अपील की थी कि दिल्ली के भ्रष्ट कांग्रेस शासन को तोड़ने के लिए पूर्ण बहुमत दें पर कहीं न कही चूक हुई और भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। चुनाव में ऐसी स्थितियां कई राज्यों में पहले भी आ चुकी हैं।
‘आप’ को पहली ही बार इतनी सीटें मिलने के सवाल पर कहा कि ‘आप’ के कार्यकर्ताओं ने दो साल पहले से ही चुनाव की तैयारियां कर ली थीं। जबकि भाजपा ने प्रत्याशी और नेतृत्व घोषणा में कुछ देरी की। इसके बावजूद जनता ने नकारा नहीं बल्कि प्रेम दिया।
जब उनसे पूछा गया कि ‘आप’ को इसी तरह लोकसभा चुनाव में सफलता मिली तो? वह मुस्कराते हुए बोले, विधानसभा और लोकसभा चुनाव में जमीन-आसमान का अंतर होता है। ‘आप’ को जो कुछ मिलना था मिल गया। ‘आप’ के मुखिया जिसके बूते इस मुकाम पर पहुंचे हैं, उन्हीं को भूल गए। इस बात को भी जनता जानेगी और इसका परिणाम भी दिखेगा।