ठंड से आप चाहे जितनी मौतें गिनाइए, सरकारी फाइलों में तस्वीर बेहद गुलाबी है। हाड़तोड़ ठंड से हुई करीब 90 मौतों के बावजूद सूबे के कलेक्टरों ने सरकार को बताया है कि उनके यहां एक भी मौत नहीं हुई है। यहां तक कि एक पशु तक नहीं मरा हैं। अफसरों ने आश्रयहीन, बेसहारा लोगों को ठंड से बचाने के लिए मुकम्मल बंदोबस्त होने भी का दावा किया है।
प्रदेश में पिछले 20 दिनों से जबर्दस्त ठंड पड़ रही है। सरकारी रिकॉर्ड की ही मानें तो अधिकतम तापमान सामान्य से पांच से 10 डिग्री कम रिकॉर्ड किया जा रहा है। ठंड और कोहरे की वजह से जिलों में जन-जीवन अस्त-व्यस्त है। मगर जब बात ठंड से हुई मौतों की हों तो जिलों के हाकिम इस सच को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
सरकार ने शीतलहर के प्रकोप को देखते हुए कलेक्टरों को कई एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए थे। पिछले दिनों लगातार आ रही ठंड से मौत की खबरों के बीच सरकार ने जब उनसे इस संबंध में की गई कार्यवाही की रिपोर्ट मांगी तो सूबे के सारे जिलाधिकारी ठंड से हुई मौतों को नकार गए।
शासन स्तर पर 31 दिसंबर 2013 को जिलों की जो समन्वित रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी गई है, उसमें शीतलहर से जनहानि या पशुहानि की बातों को पूरी तरह से नकार दिया गया है। यहीं नहीं, अफसरों ने निर्बल, आश्रयहीन, असहाय और बेसहारा व्यक्तियों के रात्रि विश्राम के लिए रैनबसेरों की व्यवस्था और वहां जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी दावा किया है।
कैसे-कैसे दावे:-
आजमगढ़ में रैनबसेरों की आवश्यकता नहीं
आजमगढ़ से रिपोर्ट आई है कि वहां करीब डेढ़ सौ अलाव जल रहे हैं। तहसीलों के जरिए ढाई हजार कंबल बांटे जा रहे हैं। मगर चौंकाने वाली बात यह बताई गई है कि वहां रैनबसेरों की आवश्यकता ही नहीं पाई गई।
इटावा में स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन जहां चाहिए ठहरिए
इटावा में 131 स्थानों पर अलाव जलाने और पांच हजार कंबल वितरण की योजना के अलावा बताया गया है कि नगर पालिका और नगर निकायों द्वारा निर्मित रैन बसेरों में मुकम्मल उपाय हैं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और पंचायत भवनों में भी रात को ठहरने की व्यवस्था है।
गोंडा के अस्पतालों में रैनबसेरों की सुविधा
गोंडा में 90 स्थानों पर अलावा की व्यवस्था और तीन हजार से ज्यादा कंबल बंटने की बात कही गई है। बताया गया है कि वहां के जिला और महिला चिकित्सालय के साथ पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रैनबसेरों की सुविधा उपलब्ध है।
शेल्टर होम्स में जो सुविधाएं होनी चाहिएं
:- दरी
:- कंबल
:- शुद्ध पेयजल
:- भोजन
:- दवा
:- अलाव जलाने की सुविधा
‘गरीब, बेसहारा व्यक्तियों को ठंड से बचाव के लिए शासन द्वारा अब तक 19.165 करोड़ रुपये जिलाधिकारियों को दिए जा चुके हैं। इसमें अस्थायी रैनबसेरों के निर्माण, कंबलों की खरीद और सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था की जानी है। जिलाधिकारियों से कहा गया है कि यदि अधिक धनराशि की आवश्यकता हो तो तत्काल उसकी मांग शासन से कर सकते हैं। गरीबों को इस ठंड से बचाने के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है।’
- एल वेंकटेश्वर लू, राहत आयुक्त एवं सचिव