फोटो-10- श्रीराम कथा सुनते भक्तगण। संवाद
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चित्रकूट। श्रीराम कथा के चौथे दिन कथा व्यास नवलेश दीक्षित ने महाराज दशरथ के चारों पुत्रों के नामकरण की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि अहंकार से बुद्धि का नाश होता है। इसी वजह से महापंडित, ओजस्वी, महाविद्वान, शक्तिशाली राजा होते हुए भी रावण का विनाश हुआ।
कामदगिरी परिक्रमा मार्ग के पास पेरातीर के हनुमान मंदिर बिहारा में कथा का आयोजन हो रहा है। मंगलवार को आचार्य ने भरत के शोक की पराकाष्ठा का वर्णन बड़े ही मार्मिक तरीके से किया। उन्होंने कहा कि यही भारतीय संस्कृति है कि नारी जाति का सम्मान हो। हर युग में जो व्यक्ति नारी का सम्मान नहीं करता उसका भी विनाश सुनिश्चित है।
आचार्य ने नामकरण के बाद वात्सल्य व बाल लीला, बाल्यकाल से ही भातृत्व प्रेम व संदेश, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के अवतार की मूल अवधारणा को समझाने का प्रयास किया। कथा के दौरान मुख्य यजमान रमेश शुक्ला व उनकी धर्मपत्नी हीरामन, कथा के आयोजक भोलेराम शुक्ला सहित चुनकावन पांडेय, संतोष मिश्रा आदि मौजूद रहे।