चित्रकूट। चार दिन हुई बारिश में कृषि विभाग महज 10 से 20 प्रतिशत नुकसान मान रहा है। पर, किसानों की राय जुदा है। उनका मानना है कि सिंचित इलाके में 40 से 50 प्रतिशत नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि वाली जगह तो पूरी फसल खराब हो गई है। किसानों को ठीक से सर्वे कराकर उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
खेती में इस बार रबी फसल की अच्छी पैदावार होने की संभावना जताई जा रही थी। पर, चार दिनों तक हुई रुक-रुक कर बारिश ने किसानों के मंसूबे पर पानी फेर दिया। सिंचित इलाके में मसूर, चना, सरसों की फसल मेें ज्यादा नुकसान हुआ है। भारतीय किसान यूनियन के महामंत्री अरुण पांडेय, मीडिया प्रभारी देवेंद्र सिंह, भाकपा के जिला सचिव अमित यादव का कहना है कि अतिवृष्टि से रबी की फसल को भारी नुकसान है। राजापुर व पहाड़ी इलाके में जहां सिंचित जमीन है, वहां पहले से किसानों ने फसल की सिंचाई कर ली थी। ऐसे में उनकी फसल बर्बाद हो गई। भरतकूप क्षेत्र के हरिहरपुर, मुकुंदपुर व घुरेटनपुर में ओलावृष्टि से भारी नुकसान है।
बीमा कराने वाले किसानों को ही मिलेगा मुआवजा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 31 दिसंबर तक रबी फसलों का बीमा हुआ है। इस बार गेहूं, चना, सरसों, मसूर की फसल के लिए 16 हजार 800 किसानों ने बीमा कराया है। मटर फसल बीमा के लिए कुछ गांवों का चयन हुआ था लेकिन किसी किसान ने बीमा नहीं कराया। अब कृषि विभाग का मानना है कि बीमित किसानों को ही अतिवृष्टि व फसलों के नुकसान का मुआवजा मिल सकेगा। जिला कृषि अधिकारी आरपी शुक्ला ने बताया कि जनपद में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया नोेडल एजेंसी है। जिसका टोल फ्री नंबर 1800-889-6868 है। इस टोल फ्री नंबर पर फसल में हुए नुकसान की सूचना 72 घंटे के अंदर देनी अनिवार्य है।
पिछली बार दी गई क्षतिपूर्ति
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि पिछले सीजन की खरीफ की फसल के दौरान अधिक बारिश से तिल, ज्वार, बाजरा, व अरहर की फसल को नुकसान हुआ था। इसका 137 ग्राम पंचायतों में सर्वे कराया गया। जिसमें 37 ग्राम पंचायतों में 682 बीमित किसानों को पहले चरण में 16.50 लाख की धनराशि क्षतिपूर्ति के तौर पर दी गई। इसके बाद व्यक्तिगत आधार पर कराये गये सर्वे में 999 किसानों को 23.98 लाख का मुआवजा दिया गया था।
बारिश थमने के बाद सरसों के खेत में टूटे पौधों को अलग करता किसान । संवाद- फोटो : CHITRAKOOT