चित्रकूट। हिंदू एकता महाकुंभ में आईं साध्वी ऋतंभरा ने बिना किसी का नाम लिए राहुल गांधी के हिंदू और हिंदुत्व वाले बयान पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहाकि बिना हिंदुत्व के हिंदू किस काम का है। हिंदू के मन में हिंदुत्व की भावना स्वत: होती है। यदि हिंदुत्व की भावना नहीं तो उसके हिंदू होने पर संदेह है।
उन्होंने भारतीय संस्कृति पर आधारित शिक्षा देने के लिए प्रेरित किया। कहा कि आज स्कूल-कालेजों में ऐसी शिक्षा दी जा रही है, जिससे युवतियां शराब और सिगरेट पी रही हैं। महिलाएं मर्दों के आचरण के अनुरूप कार्य न करें। बच्चों को तुलसी के पेड़ की तरह पवित्र बनाए रखा जाए। उन्हें अच्छे संस्कार दें।
साध्वी ऋतंभरा के अलावा अन्य संतों महंतों ने भी हिंदू और हिंदुत्व पर अपने बयान दिए। हिंदू धर्म को संगठित कर देश को शक्तिशाली बनाने, मठ मंदिरों को सरकारी तंत्र से मुक्ति दिलाने, पर्यावरण सुधारने, नदियों को स्वच्छ बनाने और हिंदू धर्म के लिए कार्य करने के लिए युवाओं को आगे आने के लिए प्रेरित किया।
आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक संत श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि देश के अच्छे भविष्य के लिए भगवान श्रीराम के आचरणों पर चलते हुए बिना भय पराक्रम के साथ कार्य करें। पर्यावरण को स्वच्छ बनाने और जनसंख्या कम करने के प्रमुख मुद्दे भी रखे गए हैं। इन पर कार्य करना बहुत जरूरी है।
परमार्थ आश्रम ऋषिकेश के मुनि स्वामी चिदानंद सरस्वती ने नदियों की स्वच्छता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यहां की मंदाकिनी नदी भी प्रदूषित हो गई। यमुना नदी तो पहले से ही प्रदूषित है। नदियों को स्वच्छ बनाना है। उन्होंने अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित किया।
मूलक पीठाधीश्वर संत राजेंद्र दास महाराज ने प्रकृति को सुधारने के लिए गाय पालने और बैलों के माध्यम से खेती करने के लिए प्रेरित किया। जगद्गुरु श्यामा शरणचार्य महाराज और महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने मठ मंदिरों को सरकारी तंत्र से मुक्ति दिलाने और मंदिरों पर लगाए गए करों को हटाने के लिए कहा।
विश्व प्रसन्नतातीर्थ जी महाराज पेजावरमठ, उड़पी कर्नाटक, जगद्गुरु रामनुजाचार्य चिन्नाजियार स्वामी महाराज हैदराबाद व गुरुशरणानंद महाराज ने हिंदू धर्म के अनुकूल कार्य करने के लिए प्रेरित किया। कहा कि यदि हिंदू धर्म को मजबूत और संगठित बनाना है तो सबसे पहले हिंदू धर्म के बनाए गए नियमों का आचरण करें। इससे अपने आप हिंदू धर्म मजबूत होगा।