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Chitrakoot News: दो विभागों की खींचतान में फंसी आस्था की धारा

Fri, 08 May 2026 12:14 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
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फोटो 07 सीकेटीपी-12- रामघाट के दिव्यांग घाट पर फैली गंदगी। संवाद
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चित्रकूट। धार्मिक आस्था और तपोभूमि के रूप में विख्यात चित्रकूट की जीवनरेखा मानी जाने वाली मंदाकिनी इन दिनों बदहाल सफाई व्यवस्था से जूझ रही है। नगर पालिका परिषद और सिंचाई विभाग के बीच की खींचतान से नदी की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। घाटों से लेकर नदी तक गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे न केवल स्थानीय नागरिक बल्कि हर वर्ष हजारों की संख्या में आने वाले श्रद्धालु भी परेशान हैं। दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
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मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी में मंदाकिनी आस्था का केंद्र है। यहां पर हर रोज हजारों श्रद्धालु आते हैं और नदी में स्नान कर पुण्य की कामना करते हैं। फिर भी मंदाकिनी की सूरत बदरंग हैं। नदी के कई घाटों पर कूड़ा, पूजा सामग्री और जलकुंभी जमा हो गई है। लगातार बढ़ रही गंदगी से नदी का पानी भी दूषित होता जा रहा है।



स्थानीय नागरिक रामकरन, भोला प्रसाद और भरत सिंह ने बताया कि मंदाकिनी नदी में सफाई का कार्य केवल तब ही होता है जब कोई मंत्री या वीआईपी स्वच्छता अभियान के तहत आते हैं। इसके बाद, केवल कागजों में ही सफाई का काम दिखाया जाता है, जबकि हकीकत में घाटों और नदी के अंदर गंदगी फैली रहती है।
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जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे विभाग :



इस गंभीर समस्या पर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता एसके प्रसाद का कहना है कि मंदाकिनी की सफाई उनकी जिम्मेदारी में नहीं आती, बल्कि यह कार्य किसी अन्य विभाग के अंतर्गत आता है। वहीं, नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी लाल जी ने कहा कि नगर पालिका केवल अपने क्षेत्र के घाटों की सफाई कराती है, जबकि नदी के अन्य हिस्सों की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है। दोनों विभागों के इस रवैये के कारण न तो नदी की समुचित सफाई हो पा रही है और न ही कोई स्थायी समाधान निकल रहा है।



पिछले साल जल शक्ति मंत्री ने यूपी एमपी में चला था सफाई अभियान



पिछले साल 25 मई को जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने स्वयं नदी में उतरकर एक सफाई अभियान चलाया था। उन्होंने भविष्य में भी सफाई जारी रखने का आश्वासन दिया था। हालांकि, उनके जाने के बाद से नदी की सफाई की जिम्मेदारी केवल समाजसेवियों पर आ गई है, जबकि संबंधित अधिकारी इस मुद्दे पर मौन हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, सफाई केवल मंत्री या वीआईपी अभियान के दौरान होती है, उसके बाद कागजों में काम होता है।



बोले जिम्मेदार-



जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने कहा कि पहले कौन सफाई कराता था, इसकी जानकारी ली जाएगी और जिम्मेदार विभागों को सफाई न होने का कारण बताने और आगे की सफाई के लिए निर्देशित किया जाएगा।

फोटो 07 सीकेटीपी-12- रामघाट के दिव्यांग घाट पर फैली गंदगी। संवाद

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