चित्रकूट। जिले के लालापुर गांव के पास स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम परिसर में संत मोरारी बापू भगवान श्रीराम के वनगमन के स्थानों से जुड़े महत्व की मार्मिक कथा सुनाई। कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन उदारमयी रहा है। जब वह वनगमन के समय ऋषियों के आश्रम पहुंचे तो भगवान के उदार भाव को देखकर ऋषि भाव विभोर हो जाते थे। श्रीराम कथा सभी से बडी है। इसके सुनने से ज्ञान तो प्राप्त होता ही है इसके साथ ही मनोरंजन भी होता है।
धर्मनगरी के झांसी-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे स्थित लालापुर गांव के वाल्मीकि आश्रम परिसर में हुई श्रीराम कथा गुरुवार की सुबह दस बजे से शुरू हुई। इसमें संत मोरारी बापू ने भगवान श्रीराम के वनगमन के समय प्रयागराज स्थित भारद्वाज ऋषि आश्रम का वर्णन करते हुए कहा श्रीराम भारद्वाज आश्रम पहुंचे। जहां उनकी उदारता देखकर ऋषि भारद्वाज भावविभोर हो गये। उन्होंने श्रीराम को वनवास के लिए चित्रकूट के स्थान को सबसे बढ़िया
स्थान बताया। इसके बाद केवट संवाद कथा सुनाई। कहा कि निषाद राज ने श्रीराम का स्वागत परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर किया और उनके चरणों को पखारा। भगवान व केवट दोनंों मित्र के सामान एक दूसरे से गले मिलते रहे। उन्होंने वाल्मीकि आश्रम का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान वाल्मीकि आश्रम मेें भी रुके। यह स्थान
अति पावन स्थान है। जहां माता सीता आज भी विराजमान है। जिनके दर्शन करने के लिए सुदूर क्षेत्र से भक्त आते हैं। यहां से चित्रकूट की ओर प्रस्थान करने के बाद भगवान श्रीराम माता सीता व भाई लक्ष्मण के साथ चित्रकूट में पर्णकुटी बनाकर रहने लगे थे।
संत मोरारी बापू कथा स्थल पर स्थानीय संतों व समाजसेवियों से मिले। संत संतोष उर्फ सतुआ बाबा बनारस, महंत भरतदास, महंत दिव्यजीवनदास और नितिन अमेटा सहित अन्य मौजूद रहे। संत मोरारी बापू ने वाल्मीकि आश्रम का विकास कराने का वादा भी किया।
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बड़ी संख्या में भक्तों ने कथा सुनी
वाल्मीकि आश्रम में पहली बार संत मोरारी बापू की कथा हुई। जहां बड़ी संख्या में कथा सुनने के लिए पहुंचे, जिसमें गुजरात से लेकर कई अन्य प्रदेश के भक्तों के साथ ही स्थानीय ग्रामीण भी मौजूद रहे। कथा के साथ ही पास में ही भंडारे का भी आयोजन किया गया जो लगातार चलता रहा जब तक कथा का समापन नहीं हो गया।
कामदनाथ मंदिर में टेका माथा
संत मोरारी बापू वाल्मीकि आश्रम में कथा सुनाने के बाद चित्रकूट में भगवान कामदनाथ मंदिर पहुंचे और माथा टेकने के बाद 56 व्यंजनों का भोग लगाया। इसके बाद साधु-संतों से मिलकर चित्रकूट क्षेत्र के बारे में जानकारी ली। वह रात्रि प्रवास चित्रकूट में ही करेंगे और शुक्रवार को दीनदयाल शोध संस्थान के सुरेंद्रपाल ग्रामोदय विद्यालय परिसर में प्रात: दस बजे से कथा सुनाएंगे। गौरतलब है कि मोरारी बापू की 27 नवंबर को कारसेवक पुरम अयोध्या धाम से शुरू होकर 5 दिसंबर तक अयोध्या धाम के विस्तार में परिक्रमा करते हुए अलग-अलग स्थानों पर कथा की जा रही है।
फोटो-7- चित्रकूट पहुंचने पर भक्तों का अभिवादन करते संत मोरारी बापू । संवाद- फोटो : CHITRAKOOT