चित्रकूट। महर्षि वाल्मीकि आश्रम के महंत के खिलाफ रविवार को पूर्व सांसद ने धरना दिया तो सोमवार को आश्रम के ट्रस्ट की कार्यकारिणी को आपातकालीन स्थिति बताते हुए भंग कर दिया गया। नई कार्यकारिणी के गठन के लिए रजिस्ट्रार को पत्र भेजा गया। वहीं, महंत को लेकर अखाड़ों के संत बैठक करेंगे।
श्री महर्षि वाल्मीकि तपोस्थली चित्रकूट प्रमुख द्वार चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष पूर्व मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, कोषाध्यक्ष डीआरआई के राष्ट्रीय संगठन मंत्री अभय महाजन ने अन्य पदाधिकारियों के साथ सोमवार को बैठक की और पूरी कार्यकारिणी को भंग कर दिया। इसके बाद प्रेस वार्ता कर कार्यकारिणी भंग के बारे में जानकारी दी। पूर्व मंत्री ने पूर्व सांसद के परिवार पर हुई अभद्र टिप्पणी पर को पूरी तरह से गलत बताया है। महंत को ऐसा नहीं करना चाहिए। बताया कि अब ट्रस्ट की नई कार्यकारिणी के गठन के लिए रजिस्ट्रार से अनुरोध किया गया है कि वह नए सिरे से चुनाव कराएं, ताकि नई कार्यकारिणी का गठन हो सके।
पूर्व मंत्री ने कहा कि अखाड़ा के सभी संत ही महंत भरत दास के बारे में कोई फैसला लेंगे। आश्रम का संचालन होता रहे इसके लिए संत सीताशरण दास व रामजी दास व राम जन्म दास को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, दिगंबर अखाड़ा के महंत दिव्य जीवनदास महाराज ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि आश्रम में कई महीनों से विवाद की स्थिति बनी हुई थी। इससे स्थानीय लोगों में आक्रोष है। कहा कि महंत भरत दास को लेकर जल्द ही अखाड़ा परिषद की बैठक होगी। इसमें सात अखाड़ों से संत कोई फैसला लेंगे। अभी कुछ सदस्य बाहर है। अखाड़ा परिषद की बैठक में चिंतन-मंथन के बाद विचार होगा। उसमें महंत भरत दास के आश्रम में रहने या न रहने का निर्णय लिया जाएगा।
यह है मामला
वाल्मीकि आश्रम के महंत भरत दास महाराज का शनिवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, इसमें महंत ने पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र की मां के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की थी। इस मामले में पूर्व सांसद ने कोतवाली में महंत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी और रविवार को परिजनों व भाजपा नेताओं के साथ आश्रम में धरना प्रदर्शन किया था। अधिकारियों के मान मनौव्वल के बाद धरना समाप्त किया था।