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कॉमन इंट्रो
चित्रकूट। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बनने से धर्मनगरी में आवागमन काफी आसान हुआ है और पर्यटक भी बढ़े हैं। हवाई यात्रा के साथ वंदे भारत सुपर फास्ट ट्रेनें भी दौड़ी लेकिन दो माह बाद ही हवाई यात्रा बंद होने से खासी किरकिरी हो गई। परिवहन की बात करें तो रात नौ बजे के बाद किसी को प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ या फतेहपुर जाना हो तो बस का कोई साधन ही नहीं है। बमुश्किल से बस स्टैंड तैयार हुआ, मगर यह भी पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पा रहा है। वजह, वर्कशाप नहीं है। तहसीलों में परिवहन सेवा और दयनीय हालत में है। जिले की किसी भी तहसील में बस अड्डा नहीं है। मऊ व राजापुर तहसील तो रेल लाइन से भी वंचित हैं। (संवाद)
12 मार्च 2024 को जिले में पहली हवाई सेवा चित्रकूट से लखनऊ की शुरु हुई थी। चार माह बाद ही इसे बंद करना पड़ा। 2025 में फिर इसे संचालित कराने का प्रयास हुआ लेकिन अभी तक फिलहाल यह बंद है। वंदे भारत सुपर फास्ट ट्रेन आठ नवंबर 2025 को शुरु हुई जो संचालित तो है लेकिन रेल अधिकारियों का कहना है कि चित्रकूट से इस ट्रेन में यात्रियों का आवागमन कम है। जिले में चित्रकूट धाम कर्वी, भरतकूप, शिवरामपुर, खोह, बहिलपुरवा, ओहन, मानिकपुर जंक्शन, पन्हाई, बरगढ़, कटैया ड़ाडी रेलवे स्टेशन हैं। इसमें चित्रकूट धाम कर्वी व मानिकपुर जंक्शन को छोड़कर अन्य सभी छोटे स्टेशन हैं। इन छोटे स्टेशनों में केवल पैसेंजर व मेमो ट्रेन ही रुकती है। इससे उस क्षेत्र के यात्रियों को मानिकपुर व चित्रकूट धाम कर्वी रेलवे स्टेशन पहुंचना पड़ता है। कुछ स्टेशनों में तो खाने पीने की चीजें भी नहीं मिल पाती हैं। इससे स्टेशन पर ट्रेन खड़ी होने पर यात्रियों को भटकना पड़ता है।
चित्रकूटधाम से गुजरतीं 60 ट्रेनें
जिले के एक मात्र चित्रकूटधाम रेलवे स्टेशन में वंदे भारत एक्सप्रेस का भी ठहराव होना बड़ी उपलब्धि जरूर है। इसी प्रकार प्रयागराज झांसी, बांदा कानुपर, लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, कोलकाता आने जाने के लिए 40 ट्रेनों का अप-डाउन ठहराव होता है। वहीं मानिकपुर जंक्शन में सारनाथ एक्सप्रेस, मुंबई-हावड़ा मेल, काशी तमिल संगम एक्सप्रेस, रीवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस, बनारस सुपरफास्ट एक्सप्रेस, महानगरी सुपरफास्ट एक्सप्रेस, सूरज ताप्ती गंगा एक्सप्रेस, कामायनी एक्सप्रेस सहित करीब 60 ट्रेनों का ठहराव अप-डाउन होता है। यहां से तो मुंबई, बिहार, दिल्ली सहित अन्य राज्यों के लिए भी ट्रेनें आसानी से यात्रियों को मिल जाती है।
पहाड़ी इलाके में सड़कों की हालत खराब
चित्रकूट। रोजाना सात सौ ट्रक मुख्यालय कर्वी से होकर राजापुर, व मऊ के रास्ते से प्रयागराज, कौंशांबी प्रतापगढ़ मिर्जापुर रायबरेली, सुल्तानपुर अयोध्या लखनऊ आदि जनपदों के लिए गिट्टी व बालू सप्लाई के लिए सप्लाई करते हैं। इसमें जिन रास्तों से यह ट्रक व डंपर निकलते है। जिसमें से कई ट्रकों में क्षमता से अधिक माल की ढुलाई की जाती है। इससे सड़कें खराब हो जाती है। सबसे अधिक सड़के भरतकूप क्षेत्र में खराब है। इसी तरह से नदियों के बालू घाटों के आसपास की सड़कें भी खराब हो जाती है।
किसी भी तहसील में स्थायी बस अड्डा नहीं
जिले के तहसील मुख्यालय राजापुर, मानिकपुर, मऊ में स्थायी बस स्टैंड नहीं है। सड़कों के किनारे रोडवेज बसें सहित अन्य यात्री वाहन खड़े होते है। जब कि कई साल से इन स्थानों में बस स्टैंड बनाए जाने जाने की मांग की जाती है। जिला मुख्यालय में अस्थायी रूप से बना रोडवेज बस स्टैंड को भी बंद कर दिया गया है। यहां भी सड़क में ही बसे खड़ी रहती है। झांसी मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग में शिवरामपुर के पास बनी भांगा नाला पुलिया वाहनों के लिए काल कई साल से बनी हुई है। कई दुर्घटनाएं होने के बाद भी आज तक पुलिया का चौड़ीकरण नहीं किया गया।
वर्जन
एक्सप्रेसवे के साथ हवाई व ट्रेन से धर्मनगरी की कनेक्टिविटी बढ़ने से रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। खराब सड़कों को बनवाने के निर्देश संबंधित विभाग को दिए गए हैं। हवाई यात्रा व वंदेभारत जैसी ट्रेन चित्रकूट से चलना बड़ी बात है। बंद हवाई यात्रा को जल्द ही संचालित कराने का प्रयास किया जाएगा।-पुलकित गर्ग, जिलाधिकारी