चित्रकूट। सदर कोतवाली क्षेत्र के चकभूपत गांव से अपहृत किसान लाला पाल मामले में पुलिस ने दावा किया कि किसी गैंग ने अपहरण नहीं किया था बल्कि कथित अपहृत ने अपने ही परिजनों को फंसाने के लिए साजिश रची थी। दो दिन पूर्व उसकी बरामदगी के बाद मानसिक स्थिति सही न होने का दावा कर उसे मानसिक रोग विशेषज्ञ चिकित्सक के पास भेजने की बात कही गई है।
पुलिस अधीक्षक धवल जायसवाल ने शनिवार को पुलिस कार्यालय में पत्रकारों से बताया कि कोतवाली कर्वी क्षेत्र के चकभूपत रजौला गांव के नत्थू पाल ने थाने में सूचना दी पिता लाला पाल 28 अगस्त की रात को खेत से गायब हो गये है। इस पर पुलिस टीमों ने तलाश प्रारंभ की। इसी दौरान सती अनसुईया रोड से लाला पाल के पास मिले। पूछताछ में बताया कि आठ लोगों ने अपहरण कर जंगल में भूखा प्यासा रखा था। पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की तो बताया कि चाचा मोहन पाल ने उसके विरुद्ध थाना कोतवाली कर्वी में मामला दर्ज कराया था जो न्यायालय में विचाराधीन है। मोहन पाल की बहू ने लाला पाल के पिता मदन आदि के विरुद्ध डीपी एक्ट थाना बदौसा जनपद बांदा में पंजीकृत कराया था। यही मुकदमे न्यायालय में विचाराधीन है। इन्हीं मुकदमों एवं जमीन के विवाद के चलते चाचा मोहन पाल पर दबाव बनाने की नियत से स्वयं मनगढंत घटना क्रम बनाकर जंगल में चला गया था।