चित्रकूट। कोषागार में हुए घोटाले की रकम से कर्मचारियों, पेंशनरों व दलालों ने खूब मौज उठाई और उस रकम को दोगुनी तिगुनी, चौगुनी करने के लिए जमीन के कारोबार में खपा दी। यह सब जमीन की खरीद फरोख्त से जुड़े कारोबारियों से मिलकर किया। इसके अलावा शेयर मार्केट में भी खूब रकम लगाई। इससे वो आर्थिक रूप से मजबूत भी हुए। ये तथ्य एसआईटी की जांच में खुलकर सामने आ रहे हैं। खास बात तो यह है कि पेंशन घोटाले की रकम में पेंशनर तो केवल नाम के मोहरा रहे। उनके हिस्से में तो 10 से 20 फीसदी ही रकम आई।
घोटाले में नामजद आरोपी सहायक कोषाधिकारी विकास सिंह सचान फतेहपुर जिले के मूल निवासी हैं। वह इस समय जेल में हैं। जानकार बताते हैं कि उसने कोषागार में रहते हुए सेमारिया जगन्नाथवासी में फार्म हाउस बना रखा है। इसके साथ ही हनुमान धारा, राजापुर, सीतापुर, कलक्ट्रेट रोड इलाके में भी हो रही प्लाटिंग में उसने अपनी हिस्सेदारी कर रखी है। फतेहपुर जिले में भी अपने परिवार के सदस्यों के नाम भी कई जमीनों की खरीद फरोख्त की है। इसी प्रकार घोटाले में चर्चित मृतक आरोपी संदीप श्रीवास्तव ने एसडीएम कालोनी में आलीशान बंगला बनाया था।
इसके अलावा घोटाले की रकम को जमीन कारोबार में खपाई गई। शहर के आसपास इलाकों में चल रही प्लाटिंग में रकम निवेश कर रखी थी। इससे रकम दिनोंदिन बढ़ रही थी। ऐसी चर्चाएं सामने आ रही हैं। इसी प्रकार दलाल गौरेंद्र शिवहरे ने भी अपनी मां की मौत के बाद करीब पांच साल तक उनकी पेंशन हड़पता रहा। उसने भी यह रकम जमीन कारोबार में निवेश किया था। उसके द्वारा एक बड़ा शोरूम भी बनवाने की चर्चा है। लेनदेन आरटीजीएस के जरिए होना पाया गया। इस घोटाले में बरहट निवासी दलाल दीपक कुमार पांडेय व पहाड़ी थाना क्षेत्र के नांदी गांव निवासी रणविजय यादव नामजद नहीं थे। जांच की पूछताछ में दोनों नाम सामने आए।
जांच में एसआईटी अफसरों ने उनके समक्ष घोटाले में शामिल होने के सबूत दिखाए तो उन्होंने उसे कबूल लिया। इस रकम को रियल एस्टेट के कारोबार में लगाया है। पेंशन खाते में रकम आने के बाद दलाल दोनों पेंशनरों को बैंक ले गए और खाते से रुपये निकलवाने के बाद उसे कोषागार कर्मियों तक उनका हिस्सा पहुंचाया। साथ ही अपना जमीन का कारोबार करते रहे। इनके अलावा शेयर मार्केट में भी घोटाले की अच्छी खासी रकम भी निवेश की गई है।