मानिकपुर। हफ्तेभर पूर्व सांस रोग से पीड़ित प्रीतम (60) को अस्पताल लेकर जा रही बैलगाड़ी कच्ची सड़क के दलदल में फंस गई थी। अस्पताल पहुंचने में देरी के कारण मरीज की सांसें थम गईं थी। परिजन इस बात को लेकर खासे आहत थे कि पक्की सड़क होती तो वह लोग समय से अस्पताल पहुंच जाते और प्रीतम की जान भी बच जाती। एसडीएम ने घटना को संज्ञान में लेकर चकबंदी विभाग के अधिकारियों से रिकार्ड मांगे और सड़क निर्माण जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए।
ब्लाक क्षेत्र के चरदहा मिश्रनपुरवा गांव में पक्की सड़क न होने का सबसे ज्यादा खामियाजा प्रसूताओं व गंभीर रोग से पीड़ित मरीजों के तीमारदारों को भुगतना पड़ता है। गांव निवासी रामसूरत ने आरोप लगाया है कि गांव से मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए डेढ़ किमी की दूरी दलदल में तब्दील है। घटना के दिन पिता प्रीतम को बैलगाड़ी से अस्पताल ले जा रहे थे। कीचड़ होने से बैलगाड़ी फंस गई। जिससे समय से अस्पताल न पहुंचने के कारण उनकी मौत हो गई। घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ। परिजनों ने बताया कि दो माह पूर्व इसी तरह प्रीतम की पत्नी को भी अस्पताल लाते समय सड़क के कारण देरी हुई थी।
मृृतक के बेटे ने रामसूरत बताया कि मानिकपुर क्षेत्र के जंगल के बीच बसे मिश्रनपुरवा गांव में छह घर हैं। प्रधान रानू देवी ने बताया कि उनका गांव 10 साल से चकबंदी की प्रक्रिया में है। जिससे सड़क नहीं बन पाई। रास्ते में कई किसानों ने फसल की बवाई भी कर लिया है। जिससे मुख्य सड़क से करीब डेढ़ किमी तक लोग कच्चे रास्ते से आते-जाते हैं। शुक्रवार को मानिकपुर एसडीएम प्रमेश श्रीवास्तव ने बताया कि चकबंदी विभाग के अधिकारियों से रिकार्ड लिया गया है। गांव की अधूरी पड़ी सड़क जल्द बनवाई जाएगी।