चित्रकूट। दहेज प्रताड़ना और खुदकुशी मामले में सत्र न्यायाधीश ने आरोपी की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज की है। न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से 17 दिसंबर 2024 को पारित आदेश को बरकरार रखा है। मजिस्ट्रेट ने इस मामले को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया था।
रैपुरा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि उसकी बेटी के साथ दुष्कर्म हुआ था। समझौते के तहत शादी की बात तय हुई लेकिन दहेज में रुपये की मांग पर शादी से इंकार कर दिया गया, जिसका न्यायालय में वाद चल रहा था। शादी टूटने से तनाव में आई युवती ने 8 अप्रैल 2024 को फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। इस घटना के बाद 11 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इस प्रकरण में आरोपी पक्ष के एक व्यक्ति ने सीजेएम न्यायालय में परिवाद दायर किया था। उसने आरोप लगाया कि नौ अप्रैल 2024 को युवती की गला दबाकर हत्या की गई थी। इसे आत्महत्या दिखाने के लिए फंदे से लटकाया गया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद आवेदन को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया था।
मजिस्ट्रेट ने पाया कि आवेदक को मामले के सभी तथ्यों, परिस्थितियों और साक्ष्यों की पूरी जानकारी थी। वह स्वयं साक्ष्य प्रस्तुत करने में सक्षम था। सत्र न्यायाधीश शेषमणि ने मजिस्ट्रेट के आदेश की समीक्षा की और उसमें कोई कानूनी त्रुटि या प्रक्रियात्मक अनियमितता नहीं पाई। अदालत ने मजिस्ट्रेट के क्षेत्राधिकार के सही प्रयोग को स्वीकार करते हुए आरोपी की पुनरीक्षण याचिका निरस्त कर दी।