चित्रकूट/राजापुर। सरकार ने गेहूं खरीद की तारीख बढ़ा दी है। अब 22 जून तक खरीद हो सकेगी। इससे किसानों को बडी राहत मिली है। वहीं खरीद केंद्रों पर सैकडा़ें किसानों का हजारों क्विंटर गेहूं बारिश में भी केंद्रों के बाहर पन्नी से ढका रखा है। अबतक जिले में दो लाख 95 हजार क्विंटल की खरीद हो चुकी है। जिला विपणन अधिकारी संजय श्रीवास्तव ने बताया कि तीन चौथाई किसानों का भुगतान भी हो चुका है। किसी भी सेंटर में अब बोरे की कमी नहीं है।
जिला प्रशासन के तमाम दावों के बाद भी मऊ, रामनगर, राजापुर, पहाड़ी व शिवरामपुर के खरीद केंद्रों में किसानों की लंबी लाइन लगी हुई है। राजापुर प्रतिनिधि के अनुसार- एक पखवाड़े से अधिक दर्जनों की तादाद में गेहूं से लदे ट्रैक्टरों के साथ क्त्रस्य केंद्रों में किसान डेरा जमाए हुए है लेकिन अभी तक नंबर नहीं आया है। रुक रुक कर हुई बारिश से किसानों का सारा गेहूं भीग गया है। केंद्र प्रभारी साधन सहकारी समिति नादिन कुर्मियान संगमलाल का कहना है कि शासन द्वारा 6 हजार क्विंटल का लक्ष्य दिया गया था जिसके सापेक्ष 9100 क्विंटल की खरीद 14 जून तक कर ली गई है और अभी बहुत से किसानों के ट्रैक्टर गेहूं लदे खड़े हैं जिनको तौलने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
किसानों की बात
किसान राजबली सिंह निवासी नांदिन कुर्मियान ने बताया कि लगभग 20 दिनों से टोकन लेकर समिति में डेरा डाले पड़े हुए हैं और नंबर का इंतजार कर रहे हैं। किसान राजेश कुमार निवासी चोरहा का कहना है कि लगभग 15 दिनों से यहां पड़े हैं और दलालों के माध्यम से जो गेहूं आता है उसे तुरंत तौल लिया जाता है। पूछने पर सचिव कहते हैं कि इनको पहले से टोकन दे दिया गया था। केशन यादव निवासी करौंदी कला का कहना है कि लगभग एक हफ्ते पहले से यहां पड़े हुए हैं और घर से भोजन मंगाकर यहीं करते हैं। जोताई, सिंचाई के कर्ज के बोझ में किसान दबा हुआ है। गेहूं तौल नहीं हुआ तो खरीफ की फसल बोने की समस्या खड़ी हो जाएगी। वीरेंद्र सिंह सिंह निवासी नांदिन कुर्मियान ने बताया कि गेहूं क्त्रस्य केंद्रों में दलालों का बोलबाला है। राजनैतिक दबाव वाले लोगों का गेहूं तुरंत तौल लिया जाता है। साधन सहकारी समिति बिहरवां व क्त्रस्य विक्त्रस्य केंद्र सहकारी समिति राजापुर, हरदौली, छीबों आदि केंद्रों में भी किसान डेरा डालकर गेहूं की बिक्त्रस्ी करने की आस में पड़ा हुआ है, लेकिन गोदाम प्रभारियों की लापरवाही व सुस्ती के कारण गेहूं किसानों का बिकने की सम्भावना बहुत कम है।