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प्रगतिशील किसान व फसल में चिपका गंधी कीट।

Wed, 27 Sep 2017 11:13 PM IST
चित्रकूट
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धान के खेत में लगे रोग की जानकारी लेते प्रगतिशील किसान - फोटो : amarujala
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चित्रकू ट। हाल ही में हुई बारिश से किसानों को धान की खेती में फायदा तो हुआ है लेकिन गंधी कीट लगने से नुकसान होने की भी संभावना बनती जा रही है। जागरूक किसान तो इसका बचाव कर रहे हैं लेकिन आमतौर पर अभी बाकी किसान इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कृषि अधिकारी ने बताया कि इसकी रोकथाम के लिए स्टाक में पर्याप्त दवाएं हैं। जिन्हें लेकर किसान धान की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं।\\

जिले में आमतौर पर मध्यम किस्म के धान की रोपाई होती है। लगभग 100 दिन बाद फसल वानस्पतिक अवस्था को पार कर बाली की दुग्धावस्था में है। इस समय जिन खेतों में पहले धान में बाली दिखती है वहां गंधी कीट का प्रकोप ज्यादा दिखता है।
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जिसका कुछ नुकसान किसानों को उठाना पड़ सकता है। किसानों का यह भी मानना है कि जब सभी धान में बाली आ जाएगी तब इसका प्रकोप कम हो जाएगा। शिवरामपुर निवासी प्रगतिशील किसान शिवकुमार शुक्ला ने बताया कि जिन धान के खेतों में बाली दिखने लगी है उसमें गंधी कीट लगने लगी है। यह कीट लंबी टांगोवाला भूरे रंग विशेष गंध के होते है। जो बालियों की दुग्धावस्था में दूध को चूसकर क्षति पहुंचाते है। प्रभावित बाली में चावल नहीं निकलता है।

   प्रगतिशील किसान शुक्ला ने बताया कि गंधी के नियत्रंण के लिए मैलाथियान पांच प्रतिशत, धूल मिथाइल पैराथियान दो प्रतिशत, धूल 20-25 प्रति हेक्टेयर राख के  साथ मिलाकर सुबह ओस में या एजाडिरेक्टिन 0.15 प्रतिशत ईसी की पांच लीटर मात्रा एक हेक्टेयर में 500 लीटर पानी मिलाकर किसान छिड़काव करें।
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इससे धान को कीट रोग का कोई खतरा नहीं रहेगा। जिला कृषि अधिकारी बंसत कुमार ने बताया कि धान की फसल में कुछ स्थानों पर गंधीकीट  लगने की संभावना है। कुछ स्थानों से किसानों ने शिकायतें भी मिली हैं। कृषि विभाग में आकर प्रभावित किसान विशेषज्ञों से राय मश्विरा कर अनुदान में दवाएं भी ले जा सकते हैं। बारिश से ज्यादा कोई नुकसान नहीं है। कुछ दिन में ही यह गंधी कीट वाला रोग नियंत्रित हो जाएगा।
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