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पुलिस ने 14 बंधक मजदूरों को मुक्त कराया

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महाराष्ट्र से लाए गए युवक। संवाद - फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट। महाराष्ट्र के लातूर जिले में जनपद के 14 मजदूरों को बंधक बनाकर मजदूरी कराई जा रही थी। बंधक मजदूर दाल मिल में काम करते थे। जिले की पुलिस ने मुक्त हुए मजदूरों को उनके परिजनों के सुपुर्द किया है। मानिकपुर के विधायक अविनाश चंद्र दिवेदी व जिला पंचायत अध्यक्ष अशोक जाटव ने भी एसपी से मिलकर मजदूरों को मुक्त कराने की मांग की थी।
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मंगलवार को पुलिस अधीक्षक धवल जायसवाल ने बताया कि बीती 25 मार्च को थाना मानिकपुर में रामनरेश कोल निवासी ग्राम करौंहा थाना मारकुंडी ने थाने में तहरीर देकर बताया था कि उसके पुत्र सुभाष व विक्त्रस्म सहित गांव के 19 युवकों को चुन्नू दर्जी निवासी ग्राम रामपुर थाना मानिकपुर काम कराने के लिए दो माह पहले लातूर ले गया था।
कुछ दिन बाद गांव के जगदीश, दिलीप कोल सहित कुल सात लोग वापस आ गये। पूछताछ में जगदीश ने बताया कि सुभाष, विक्त्रस्म सहित गांव के अन्य लोगों से लातूर में बंधक बनाकर मजदूरी कराई जा रही है। इस पर चौकी प्रभारी सरैंया प्रवीण सिंह, आरक्षी अरुण यादव लातूर पहुंचे और महाराष्ट्र पुलिस की मदद से गांव के 12 युवकों के अलावा दो अन्य युवकों को मुक्त कराकर वापस लाए। एसपी ने बताया कि सभी मुक्त कराए गए मजदूरों को उनके परिजनों के सुर्पद कर दिया गया है।
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मजदूरी मांगने पर बरसते थे लात-घूंसे
चित्रकूट। जिला पंचायत अध्यक्ष अशोक जाटव ने बताया कि बंधक मजदूरों के मुताबिक उन्हें मजदूरी भी नहीं दी जाती थी। जब कभी वे मजदूरी मांगते थे तो उन पर लात-घूंसे बरसाए जाते थे। जिसकी वजह से मजदूर अपनी जुबान पर ताले लगाए रहते थे।
मशीनों के शोर में दब जाती थीं चीखें
मुक्त हुए मजदूरों ने पुलिस को बताया कि उनसे एक दाल मिल में नौकरी कराई जाती थी। जिसका मलिक कौन था, उन्हें नहीं पता था। वे सिर्फ ठेकेदार चुन्नू दर्जी व डभौरा के चंदन को ही जानते थे। मिल में ही उनकी पिटाई की जाती थी, मशीनों के शोर के कारण उनकी चीखें भी बाहर नहीं निकल पाती थी।
दर्जी व चंदन से पूछताछ कर रही महाराष्ट्र पुलिस
पुलिस सूत्रानुसार मजदूरों को जनपद से ले जाने वाले चुन्नू दर्जी व चंदन को महाराष्ट्र पुलिस ने अपने पास रखा हुआ है। दोनों से पूछताछ की जा रही है, कि वे लोग और कहां-कहां से मजदूर पकड़कर महाराष्ट्र लाते थे। दोनों के खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस कार्रवाई कर सकती है।
अपनों से मिलकर छलछला उठीं आंखें
जबसे ग्रामीणों को मजदूरों के बंधक होने की बात पता चली थी, उनकी नींद व भूख सब गायब थी। पुलिस ने मुक्त हुए मजदूरों को उनके परिजनों के सामने किया तो वे एक-दूसरे के गले मिलकर रो पड़े। कोई ईश्वर तो कोई पुलिस को बार-बार धन्यवाद दे रहा था।

महाराष्ट्र से लाए गए युवक। संवाद- फोटो : CHITRAKOOT

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