चित्रकूट। कोरोना काल के समय परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा है। निजी स्कूलों की पढ़ाई महंगी होने के कारण कई अभिभावक अपने बच्चों के नाम सरकारी स्कूलों में लिखाए तो कई की तो पढ़ाई बीच में ही छूट गई है। कुछ का कार्य किसी तरह से चल रहा है।
उदाहरण के तौर पर ग्रीन कान्वेंट स्कूल के प्रधानाचार्य राजेश कुमार ने बताया कि कोरोना काल में उनके स्कूल में लगभग 15 फीसदी विद्यार्थी कम हो गए। छात्र संख्या 1100 से घटकर 900 हो गई। जेपी इंटर कालेज के प्रबंधक जेपी मिश्र ने बताया कि उनके कालेज में लगभग 10 फीसदी छात्रों की वृद्धि है। यहां छात्र संख्या दो हजार से बढ़कर ढाई हजार हो गई।
केस-1- शहर के पुरानी बाजार निवासी कंप्यूटर आपरेटर धर्मेंद्र कुमार कहते हैं कि कोरोना काल में कार्य बाधित रहने से अपने बच्चों की फीस जमा करने में परेशानी का सामना उठाना पड़ा। बेड़ मुश्किल से इंतजाम कर फीस जमा की।
केस - 2 कसराई चुनकावन ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण समस्या का सामना करना पड़ा। ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल नहीं था। आर्थिक संकट भी चल रहा था। किसी तरह से जुगाड़ कर मोबाइल खरीद कर पढ़ाई शुरू कराई।
केस- 3- अगरहुणा गांव के छात्र मुकेश व आकाश ने बताया कि कोरोना काल में मानसिक तौर पर परेशानी का सामना करना पड़ा। महामारी के कारण आर्थिक स्थिति खराब हुई तो पढ़ाई तक बंद हो गई। हिम्मत नहीं हारी कालेज खुलने के बाद पढ़ाई शुरू की।
पं साधो प्रसाद शिक्षा निकेतन के प्रधानाचार्य पंकज दुबे ने बताया कि कोरोना काल में जिन छात्र-छात्राओं के परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी। उनकी तीन माह की फीस माफ कर दी गई थी। इसके अलावा कापी किताबों का भी इंतजाम कराया था।
पंकज दुबे।- फोटो : CHITRAKOOT