चित्रकूट। राज्य सरकार ने धार्मिक, ऐतिहासिक व अधिक आबादी वाले शहरों को बेहतर व आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करने के उद्देश्य से चित्रकूट तीर्थस्थान को भी चुना है। विकास प्राधिकरण को इसके लिए सिटी डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के लिए कहा गया है। इन शहरों की देश-विदेश में ब्रांडिंग भी की जाएगी। इस पर चित्रकूट के आम लोगों, व्यापारियों, साधु संतों ने खुशी जाहिर की है।
चित्रकूट बड़ी संख्या में तीर्थ यात्री आते हैं। यहां पर हर माह अमावस्या पर्व मेें मेला लगाता है। दीपवाली में पांच दिन तक मेला लगता है। इसमें 25 लाख से अधिक श्रद्धालु आते है। इसके बावजूद यहां पर सुविधाएं न होने से श्रद्धालुओं को जूझना पड़ता है। सड़क, बिजली, पानी की सुविधाएं सहीं नहीं है। अतिक्रमण के कारण आए दिन जाम लगता है। वाहनों की पार्किंग की सही व्यवस्था नहीं रहती है। कई स्थानों पर जलभराव की भी समस्या है।
साधु-संतों ने जताई खुशी
सिटी डेवलपमेंट प्लान में चित्रकूट के चयनित होने पर साधु-संतों व समाज सेवियों ने खुशी जाहिर की। दिगंबर अखाड़ा के महंत दिव्यजीवनदास, जानकीमहल के महंत सीताशरण दास व कामदगिरी प्रमुख द्वार के संत मदनदास ने बताया कि चित्रकूट तीर्थ स्थान को सिटी डेवलपमेंट प्लान में लेकर विकास कार्य करने से बहुत लाभ होगा। पर्यटकों को सुविधाएं मिलने के साथ ही स्थानीय निवासियों को समस्याओं से निजात मिलेगी। समाजसेवी आलोक द्विवेदी, अभिमन्यु, बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि सही योजना बनाकर कार्य करने से यहां का सही विकास होगा।
होंगे विकास कार्य
सिटी डेवलपमेंट प्लान के तहत चित्रकूट तीर्थ स्थान पर सड़क, बिजली, पानी, एयरपोर्ट, आधुनिक होटल, सीवर लाइन, आधुनिक बस स्टैंड सहित अन्य विकास कार्य कराएं जाएंगे।
लकड़ी के खिलौने का कारोबार भी बढ़ेगा
चित्रकूट में लकड़ी के खिलौनों को एक जिला एक उत्पाद की श्रेणी में चुना गया है। इसका भी प्रचार-प्रसार किया जाएगा। ताकि इस कार्य को करने वाले कारीगरों, दुकानदारों की आर्थिक स्थिति ठीक हो। देश-विदेश में उनके उत्पाद की पहचान बने।
यूपी-एमपी सीमा पर अड़ंगा
तीर्थ स्थान चित्रकूट यूपी व एमपी सीमा में पड़ता है। इससे मंदाकिनी नदी के किनारे बने रामघाट व कामदगिरी परिक्रमा मार्ग का कुछ भाग यूपी तो कुछ एमपी क्षेत्र में पड़ता है। इससे विकास कार्य में अड़गा आ जाता है। यूपी व एमपी सरकार ने सीमा से दस किलोमीटर पर धर्मस्थलों को देखते हुए, तहबाजारी, पार्किंग, सीमा प्रवेश शुल्क से मुक्त कर रखा है। इस योजना के क्रियान्वयन में एमपी सरकार से भी अनुमति लेनी पड़ेगी। ऐसे में विकास कार्यों में देर हो सकती है।
यह है योजना
शासन ने प्रदेश के विकास प्राधिकरणों को दिशानिर्देश जारी किए हैं कि वे धार्मिक, ऐतिहासिक और अधिक आबादी वाले जिलों में बेहतर व आधुनिक सुविधाओं के लिए सिटी डेवलपमेंट प्लान तैयार करें। यह प्लान पचास लाख की आबादी को ध्यान में रखकर बनाया जाना है। चयनित 14 जिलों में चित्रकूट, मथुरा और वाराणसी का विकास खाका ऐसे तैयार किया जाए कि उसकी पहचान विश्वस्तरीय बन सके।