चित्रकूट। कोषागार विभाग के 43.13 करोड़ के घोटाला मामले में शनिवार को अवकाश के बाद भी विभाग व एसआईटी कार्यालय में पेंशनरों की फाइलें खुली रहीं। बैंक खाते से लेकर अन्य कागजातों का मिलान किया गया। खासकर एसआईटी के सामने अदालत पहुंचे आरोपियाें के कागजात एकत्र करने की मुश्किलें रहीं। अब तक हाईकोर्ट व जिला कोर्ट में 12 लोगों के कागजात जमा कर पुलिस अपना पक्ष रख रही है।
कोषागार विभाग में पेंशन भेजने के साथ ही अन्य मदों का करोड़ों रुपये पेंशनर के खाते में भेजने और बिचाैलिया व पेंशनरों से सांठगांठ कर रकम निकालकर निजी प्रयोग करने का मामला सामने आया है। इस मामले में 99 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज है। 24 पेंशनर, दो विभागीय अधिकारी व छह बिचौलिए जेल जा चुके हैं। साढे तीन करोड़ से अधिक की रिकवरी भी हो चुकी है लेकिन तीन दिन से न के बराबर रिकवरी है।
ज्यादातर आरोपी कोर्ट की मदद ले रहे हैं। जेल जा चुके आरोपियों में नौ ने जमानत के लिए अदालत में याचिका डाली है। अधिवक्ता आशीष तिवारी ने बताया कि छह की पहले ही जमानत याचिका निरस्त हो चुकी है। तीन आरोपियाें ने हाईकोर्ट में गिरफ्तारी से बचने के लिए याचिका डाली है। इन सभी के कागजात कोर्ट ने पुलिस से मांगे हैं। शनिवार को एसआईटी से लेकर थाना पुलिस टीम कोषागार घोटाला मामले से जुडे़ सभी कागजात का संकलन कर रही है। खासकर खाते में आई धनराशि, बैंक खाते से मिलान, रुपये निकालने और इसके प्रयोग से लेकर पेंशनर का इतिहास तक खंगाल रही है।
इन पेंशनरों ने जमा की बताई गई धनराशि
चित्रकूट। कोषागार घोटाले में आरोपी पेंशनरों में कुल 27 ऐसे हैं जिन्होंने उनके खाते में दर्शाई गई पूरी धनराशि जमा कर दी है। इसमें विष्णु किशोर, कृष्ण किशोर, त्रियुगी देवी, युगुल किशोर, रुकमनि देवी, नीलकंठ, अवधेश कुमार, राधेश्याम, कैलाश नाथ, जयश्री, लल्लू प्रसाद, रानी देवी, लक्ष्मी देवी, महिपाल, बुल्लू, काशीनाथ, घनश्याम, जीवनलाल, नत्थूराम, राजनारायण, गिरिजा प्रसाद, इंद्रपाल, सरमनिया, अवधेश नारायण, रानीदेवी द्वितीय, कामता प्रसाद व बलवंत हैं।
शासन को भेजी जांच रिपोर्ट पर भी उठे सवाल
चित्रकूट। कोषागार घोटाला मामले में प्रशासन की पहली जांच एडीएम न्यायिक अरुण कुमार व एडी कोषागार विभाग विष्णुकांत द्विवेदी ने कर शासन को भेज दी है। पहले यह माना गया था कि इस रिपोर्ट के आधार पर कोषागार विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा किए गए सांठगांठ से करोड़ों का घोटाला करने वाले जेल जाएंगे लेकिन सिर्फ दो एटीओ विकास सचान व एकाउंटेंट अशोक कुमार ही जेल गए हैं। एक आरोपी एटीओ संदीप श्रीवास्तव की मृत्यु हो चुकी है। रिटायर्ड एटीओ अवधेश प्रताप सिंह लापता हैं। इनकी तलाश पुलिस कर रही है। इन्होंंने हाई कोर्ट में गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम याचिका डाली है। इस रिपोर्ट के जमा करने के आठ दिन बाद भी सिर्फ विकास सचान व अशोक कुमार काे निलंबित किया गया है जबकि दावा किया गया कि रिपोर्ट में कई और की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। सपा के प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य अनुज यादव ने कहा कि कई और भी दोषी निश्चित हैं। इसमें बडे अधिकारी भी हैं जिन्हें बचाने के लिए काम हो रहा है। इसकी नए सिरे से जांच जरुरी है।