पन्ना टाइगर्स से भाग कर आई शेरनी की तलाश में
यूपी-एमपी वन विभाग की टीम दिन रात उसकी तलाश में जूटे है। लेकिन अब तक
उसका पता नहीं लगाया जा सका है। शेरनी की ओहन-बहिलपुरवा के जंगल की तरफ आने
की लोकेशन मिली है। पन्ना से आए दो हाथी पर सवार होकर प्रशिक्षित कर्मचारी
घने जंगलों में घूम रहे हैं।
तीन दिनों से मानिकपुर से लेकर बहिलपुरवा
के जंगलों में पन्ना टाइगर्स प्रोजेक्ट से भागकर आई शेरनी की तलाश में सभी
लगे हैं। उसके गले में लटके ट्रांसमिशन से मिली लोकेशन के अनुसार सोमवार को
वह उमरहन जंगल के पास थी। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार शेरनी ओहन से
बहिलपुरवा रेल ट्रैक के उस पार है।
यदि इसी मार्ग पर चलती रही तो शेरनी
बगदरा घाटी की ओर जा सकती है। शेरनी की तलाश में पन्ना व चित्रकूट वन विभाग
की टीम के एक दर्जन से अधिक अधिकारी व कर्मचारी जंगल में दिन रात लगे हैं।
जंगली रास्ते में परेशानी होने के कारण पन्ना से दो हाथी बुलाए गए हैं।
हाथियों पर सवार होकर प्रशिक्षित कर्मचारी दूरबीन व अन्य यंत्रों से शेरनी
का पता लगाने में जुटे हैं। अब तक कोई सफलता नहीं मिली है।
शेरनी
को ढ़ूंढने में हाथी के मदद लेने के मामले में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण
प्राधिकरण पन्ना के प्रतिनिधि राजेश कुमार दीक्षित ने बताया कि प्रशिक्षित
हाथी में शेरनी की गंध महसूस करने की शक्ति ज्यादा होती है।
जंगल के
उबड़-खाबड़ रास्ते में उंचाई से हाथी पर ही बैठकर तलाश करने में आसानी होती
है। इसके अलावा शेर जल्दी हाथी पर हमला भी नहंीं करती।
पन्ना
की लापता हुई शेरनी को ढ़ूंढने आए पन्ना वन विभाग टीम के अधिकारी नन्हें
सिंह चौहान, आलोक कुमार व संजीव गुप्ता ने बताया कि चित्रकूट वन विभाग की
टीम के कुछ सदस्य खोजबीन में सहयोग नहीं कर रहे।
कुल छह सदस्य जनपद के इस
काम में लगे हैं लेकिन सिर्फ दो ही मदद करते हैं बाकी तो आते भी नहीं हैं।