अन्ना प्रथा से परेशान किसानों ने मवेशियों को पकड़कर प्रशासन के हवाले कर दिया। वहीं प्रशासन ने गौशाला संचालक को गायें सौंप दी, लेकिन लापरवाही के चलते रविवार को चार गाय की मौत हो गई। तीन दिन के अंदर दस गाय इस गौशाला में मर चुकी हैं। एसडीएम ने मौके पर जाकर घटना की जानकारी ली। गौशाला संचालक ने प्रशासन पर ही अनसुनी करने का आरोप मढ़ा है।
दैवी आपदा से परेशान मुख्यालय के आसपास गांव के किसानों ने एक माह के अंदर लगभग एक हजार अन्ना मवेशियों को पकड़कर प्रशासन के हवाले कर दिया। जिसमें ज्यादातर गाय आसपास के गौशाला में भेज दी गई। प्रशासन ने इसके लिए गौशाला संचालकों को सुविधाएं व धनराशि भी दी। रविवार को मुख्यालय से लगे कर्वी माफी गांव में संचालित देवराज गौसेवा सदन एंव शिवराम सेवा ट्रस्ट में चार गाय की मौत होने से ग्रामीण भड़क गए।
प्रधान पति बद्री पटेल व भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के प्रदेश महासचिव कृष्ण राज सिंह ने गौशाला संचालक पर लापरवाही का आरोप लगाकर अधिकारियों को सूचना दी। आरोप लगाया कि गौशाला में कोई मानक नहीं है। खुले आसमान के नीचे इस ठंड में गाय रहती है। उन्हें भरपूर चारा नहीं दिया जाता है। तीन दिन के अंदर दस गाय की मौत हो चुकी है। जानकारी पर सदर एसडीएम रजनीश मिश्रा व पशु चिकित्सक डा. एचएस बबेले मौके पर पहुंचे।
गौशाला संचालक राजेश कुमार ने बताया कि जगह कम है। किसी जानवर की मौत भूख की वजह से नहीं बल्कि बीमारी से हुई है। प्रशासन से मिली सहायता के सवाल पर कहा कि उन्हें 200 गाय दी गई थी। उसके बदले में सिर्फ दस हजार रूपये मिले थे। इसके बावजूद ट्रस्ट की ओर से लगातार उन्हें चारा दिया जा रहा है। ठंड से बचाने के लिए गौशाला में बांस लगाकर मोटी पॉलीथिन लगाई जाएगी।
सदर एसडीएम ने बताया गौशाला संचालक से पूछताछ के बाद मवेशियों को ठीक ढंग से रखने के निर्देश दिए गए हैं। मृत मवेशियों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। लापरवाही पाए जाने पर संचालक के खिलाफ कार्रवाई होगी।