चित्रकूट। पुलिस एसटीएफ की मुठभेड़ में मारे गये डाकू गौरी के साथी भालचंद्र के मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की टीम जिला मुख्यालय पहुंची। इस मामले के तथ्यों को जुटाने के बाद मृतक के गांव पडवनिया भी गई और परिजनों से बातचीत कर दावा किया कि इस मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग संज्ञान ले चुका है लेकिन आयोग की ओर से मांगी गई जांच आख्या का जवाब अभी तक नहीं दिया गया है।
इस टीम के सदस्यों ने यह भी दावा किया कि यूपी में सन 2017 से अबतक 150 से अधिक फर्जी मुठभेड़ों में हत्याएं हुई हैं, इनमें किसी भी केस में पुलिस पक्ष के ऊपर रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई और न निष्पक्ष जांच हुई।
मानवाधिकार टीम के सदस्य विपुल कुमार, अभिलाषा चौधरी, अधिवक्ता मंगला वर्मा व समाजसेवी राजा भइया मृतक 25 हजार के इनामी भालचंद्र के गांव पडवनिया पहुंची। परिजनों से बातचीत के बाद जिला मुख्यालय में अधिवक्ता राजेंद्र यादव से इस मामले से जुड़े तथ्य एकत्र किए। टीम सदस्यों ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मुठभेड़ सही नहीं है।
असंवैधानिक तरीका व अमानवीय तरीका अपनाया गया है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट व परिवार के सदस्यों के बयानों में कई अंतर हैं। यूपी में पहले भी ऐसे कई मामले हुए हैं जिसमें पुलिस तथ्य छिपाकर फर्जी मुठभेड करती है। इसके सच के लिए निष्पक्ष जांच की जरूरत है। इस संबध में जिले के अधिवक्ता राजेंद्र यादव ने बताया कि टीम ने कई रिकार्ड एकत्र किये हैं।
सामग्री लौटाने की भी तारीख बढ़ी
चित्रकूट। मुठभेड़ में मारे गए 25 हजार के इनामी भालचंद्र की पत्नी नथुनियादेवी ने बताया कि उसने अदालत के माध्यम से पुलिस से अपने पति के मारे जाने के दौरान बरामद सामग्री लौटाने की मांग की है। इसकी बृहस्पतिवार को तारीख लगी थी लेकिन अब तारीख बढ़कर 18 अक्तूबर हो गई है। अधिवक्ता राजेंद्र यादव ने बताया कि इस मामले में पुलिस टीम की ओर से कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर अदालत ने तारीख बढ़ा दी है।
यह है मामला
चित्रकूट। 31 मार्च 2021 को चित्रकूट जिले के बहिलपुरवा थाना क्षेत्र के जंगल में एसटीएफ व पुलिस टीम की डाकू गौरी यादव के साथी/ रिश्तेदार 25 हजार के इनामी भालचंद्र से मुठभेड़ हुई थी, जिसमें भालचंद्र मारा गया था। इसी मामले को लेकर मृतक की पत्नी नथुनिया ने अदालत के जरिए इसे फर्जी मुठभेड़ बताया। जिस पर अदालत ने सात अक्टूबर को तत्कालीन एसपी समेत 17 पुलिस टीम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। अभी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है। इसके लिए अदालत ने अब 21 अक्टूबर तक का समय देकर 22 अक्टूबर को रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।