चित्रकूट। जिला अस्पताल की अव्यवस्थाएं शनिवार को प्रदेश के पर्यटन मंत्री और चित्रकूटधाम मंडल के प्रभारी जयवीर सिंह के सामने भी आ गईं। यहां औचक निरीक्षण करने पहुंचे तो हालात देखकर दंग रह गए। वे डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही की वजह सेबेड पर मृत पड़ी महिला को भी फल बांट गए। बाद में पता चला तो अस्पताल प्रशासन पर बिफर पड़े। डीएम से इस प्रकरण की रिपोर्ट मांगी और इलाज कर रहे डॉक्टर पर कार्रवाई के निर्देश दिए।
दरअसल प्रभारी मंत्री जनरल वार्ड में सभी मरीजों को फल बांट रहे थे। यहीं पर चरदहा निवासी मैकी (30) का इलाज चल रहा था। वे जब महिला के बेड के पास पहुंचे तो उस पर चादर पड़ी थी। मंत्री ने उसकी मां से हालचाल पूछा और मरीज के लिए फल दिए। प्रभारी मंत्री वार्ड से बाहर ही पहुंचे थे कि एक महिला ने बताया कि जिसे वे फल देकर आए हैं वह महिला मृत पड़ी है। प्रभारी मंत्री फिर लौटकर गए।
डॉक्टर को बुलाकर पुष्टि कराई तो बात सही निकली। मां भी नहीं समझ पाई थी कि बेटी मृत है या सो रही है। मां ने आरोप लगाया कि डॉक्टर इसके इलाज में लापरवाही कर रहे थे। बुलाने पर नहीं आते थे। इस पर प्रभारी मंत्री ने सीएमओ डॉ. भूपेश द्विवेदी और सीएमएस डॉ. राजेश खरे से नाराजगी जताई। जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल से कहाकि प्रकरण की जांच कराएं और इलाज कर रहे डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करें।
इससे पहले प्रभारी मंत्री ने मरीजों से इलाज एवं दवाओं के बारे में जानकारी की। जच्चा-बच्चा वार्ड, जनरल वार्ड, पोषण पुनर्वास व एसएनसीयू वार्ड में भर्ती बच्चों का हालचाल लिया। जनरल वार्ड में आग से झुलसे मरीज को बर्न वार्ड में भर्ती कराने के निर्देश दिए। इस दौरान एसपी अतुल शर्मा, सीडीओ अमित आसेरी, भाजपा जिलाध्यक्ष चंद्रप्रकाश खरे, जिला पंचायत अध्यक्ष अशोक जाटव, ब्लाक प्रमुख सुशील द्विवेदी, भाजपा जिला प्रभारी देवेश कोरी, जिला उपाध्यक्ष पंकज अग्रवाल मौजूद रहे।
अमर उजाला की खबरों को लिया संज्ञान
अस्पताल के निरीक्षण के दौरान प्रभारी मंत्री ने दो बार जच्चा बच्चा वार्ड में जाने की इच्छा जताई। कई बार उन्हें टरकाने की कोशिश की गई। जब अस्पताल प्रशासन उन्हें इधर उधर घुमाता रहा तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहाकि वहां ले चलें जहां की पिछले दिनों खबरें छपी थीं। मौके पर जाकर प्रसूताओं, परिजनों, डॉक्टरों और स्टाफ से चर्चा की।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से मरीज की मौत का यह पहला मामला नहीं है। 15 अप्रैल को जच्चा बच्चा वार्ड में भर्ती गर्भवती रोशनी मिश्रा के साथ भी यही हुआ था।
अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं था। नर्स और आया ने रोशनी का प्रसव कराया। आखिरकार उसकी बच्चेदानी बाहर आ गई और अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। घर पर सो रहे डॉक्टर को बुलाने के लिए परिजन और अस्पताल के कर्मचारी गए लेकिन उन्होंने दरवाजा नहीं खोला। फोन भी नहीं उठाया। आखिरकार प्रसूता की तड़पकर मौत हो गई। इस प्रकरण में डा. रफीक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई है।
अस्पताल की छत पर मिली शराब की बोतल
निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सदस्य मीरा जाटव ने कई समस्याओं की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। आरोप लगाया कि अस्पताल भवन की छत पर स्टाफ शराब पीता है। वहां बोतलें पड़ी हैं। वहां पर कुछ लोग पहुंचे तो देशी शराब की तीन बोतलें पाए जाने का दावा किया गया है। (संवाद)
फोटो- 8-चित्रकूट में जिला अस्पताल में जच्चा बच्चा केंद्र का निरीक्षण के दौरान सीएमएस से जानकारी ल?- फोटो : CHITRAKOOT