रामायण मेला के सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार।
- फोटो : रामायण मेला के सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार।
चित्रकूट। धर्मनगरी के रामायण मेला के समापन पर रविवार रात कलाकारों ने बेहद रोचक प्रस्तुतियां दी। वृंदावन के कलाकारों ने फूल की होली खेली। मंच पर भगवान कृष्ण का गोपिकाओं संग फूलों की होली खेलने के मंचन ने दर्शकों का मन मोह लिया। होली के मनोहर गीत गाए। कलाकारों ने दर्शकों के ऊपर भी खूब फूल बरसाए। आकाशवाणी के कलाकारों ने भजन व लोकगीत प्रस्तुत किया। धनुष यज्ञ व कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। नई दिल्ली से आए कलाकारों ने लाइट व साउंड शो के माध्यम से धनुष यज्ञ लीला का मंचन किया। आकाशवाणी दिल्ली के कलाकारों ने बुंदेली लोकगीत में आल्हा उदल की वीरता के किस्से प्रस्तुत किया। जिसे देखकर दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए। बांदा की सरला गुप्ता ने कजरी प्रस्तुत किया।
चित्रकूट। रामायण मेला के 52 वें महोत्सव का समापन पद्य विभूषित तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामभद्राचार्य ने किया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए जो लोग गलत प्रचार कर रहे है। वह सनातन विरोधी है। कहा कि राष्ट्रीय रामायण मेला अद्वितीय है। इस मेला को अगली बार से और अधिक भव्य रूप दिया जाएगा।
दूसरी ओर, डाॅ राममनोहर लोहिया प्रेक्षागृह में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें कवियों ने अपनी अपनी रचनाएं प्रस्तुत किया। शुभारंभ सुनील सौम्य ने किया। आचार्य डाॅ रामलाल द्विवेदी प्राणेष ने कहा कि भगवान कृष्ण और राम की महिमा का बखान किया। कवि श्री नारायण तिवारी ने कहा कि जो माता-पिता की पूजा करते। उसे दूसरे की पूजा करने की जरूरत नहीं है। कवि दिनेश दीक्षित, रीना सिंह ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत किया है। अध्यक्षता संत मदन गोपाल दास महाराज और मुख्य अतिथि पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्र रहे। कार्यकारी अध्यक्ष प्रशांत करवरिया व महामंत्री करुणा शंकर द्विवेदी, अभय निर्भीक, घनश्याम अवस्थी, प्रद्युम्न दुबे, राजाबाबू पांडेय ने कवियों को सम्मानित किया। संचालन नीरज पांडेय ने किया।