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प्रधानाध्यापक के हत्यारोपी को आजीवन कारावास

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चित्रकूट। अनुसूचित जाति के प्रधानाध्यापक की लाठी से पीटकर हत्या करने के मामले में आरोपी पर दोष सिद्ध हो गया। न्यायालय ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही जुर्माना भी लगाया है।
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गुरुवार को अभियोजन अधिकारी जगतपाल ने बताया कि भौरी गांव के गेटापुरवा निवासी अनुसूचित जाति के रामचंद्र प्रसाद ने 22 दिसंबर 2011 को रैपुरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसमें वादी ने बताया था कि उसके जीजा कोदूराम अतरौली बसिला के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक पद पर कार्यरत थे। 22 दिसंबर 2011 को दोपहर 11:30 बजे वह जीजा से मिलने जा रहा था। इस दौरान उन्होंने देखा की स्कूल से थोड़ी दूर पर उनके जीजा कोदूराम को बसिला गांव के गंगाराम के पुरवा निवासी चुनबाद उर्फ पुष्पराज ने लाठी से मारकर गिरा दिया।
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यह देख वह दौड़कर वहां पहुंचा। इस दौरान विद्यालय में कार्यरत सहायक अध्यापक, रसोईया, स्कूली बच्चों और अन्य ग्रामीणों द्वारा शोर मचाने पर हमलावर चुनबाद मौके से भाग निकला। लाठी से चोट सिर और मुंह पर लगने के कारण मौके पर ही कोदूराम की मौत हो गई।
पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीले सुनने के बाद न्यायालय स्पेशल जज एससी/एसटी के पीठासीन अधिकारी सतीशचन्द्र द्विवेदी ने दोषसिद्ध होने पर अभियुक्त चुनबाद उर्फ पुष्पराज को आजीवन कारावास की सजा और 20 हजार रुपये के अर्थदंड लगाया है।
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