चित्रकूट। अपने सुहाग की सलामती के लिए निर्जला व्रत रखकर चंद्रमा का अर्घ्य करने वाली सुहागिनों ने करवा चौथ मनाने की तैयारियां पूरी कर लीं हैं। सुहागिनों का यह खास पर्व बुधवार (4 नवंबर) को है। पूर्व संध्या पर मंगलवार को बाजार सुहागिनों से आबाद रहा। पूजा और श्रृंगार सामग्री की जमकर खरीददारी हुई। ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में महिलाएं खरीदारी करने के लिए आईं। साड़ी से लेकर जेवरात तक की खूब खरीददारी हुई।
हर साल कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का पर्व मनाया जाता है। इस साल भी सुहागिनें आने पति की सलामती के लिए निर्जल उपवास रहती हैं। मान्यता है कि उनके द्वारा किया गया अन्न जल का यह उत्सर्ग उनके पति की समृद्धि, दीर्घायु और कल्याण के लिए होता है।
पतिव्रता स्त्री में यम का सामना करने की शक्ति
चित्रकूट। भरतमंदिर के महंत दिव्यजीवनदास व भागवत पीठ के व्यास नवलेश दीक्षित ने बताया कि करवा चौैथ की पारंपरिक कहानी स्त्री शक्ति का बोध कराती है। इसके अनुसार वीरवती उर्फ करवा नामक एक महिला के पति को नदी में स्नान करते हुए एक मगरमच्छ ने पकड़ लिया था। करवा ने उसको एक सूत्र से बांध दिया। और यम से उसको नरक में भेजने के लिए कहा। करवा नामक महिला ने यम को शाप देने की धमकी दी। मान्यता है कि पतिव्रता स्त्री मेेें मृत्यु के देवता यम का भी सामना करने की शक्ति होती है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी द्रोपदी को इस व्रत का पालन करने के लिए कहा था।