चित्रकूट। भगवान श्रीराम की तपोस्थली में 49 वां रामायण मेला का आयोजन परंपरागत तरीके से शुरू हुआ। मठ मंदिरों के संत महंतों की शोभायात्रा जब धर्मनगरी की सड़कों पर निकली तो सडृक के दोनों ओर खडे़ होकर प्रणाम किया और कई ने संत महंतों का स्वागत व सम्मान किया। आचार्य आश्रम के महंत बद्री प्रपन्नाचार्य राजगुरु महराज ने दीप जलाकर मेले का विधिवत शुभारंभ किया। कहा कि तीर्थ क्षेत्र में ऐसे आयोजनों से धार्मिक प्रभुत्व बढ़ता है और पूरे देश में सुख शांति का संदेश जाता है।
भीषण गर्मी के चलते रविवार की देर शाम को मठ मंदिरों के निशान ध्वज लेकर संत महंतों की शोभायात्रा निकली। जिसमें हाथी घोडा व अन्य आकर्षक झांकियां थी। रामायण मेला परिसर पहुंचने पर राष्ट्रीय रामायण मेला के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश करवरिया ने परंपरानुसार संत महंतों का अभिवादन कर आशीर्वाद लिया।
आचार्य आश्रम के महंत के साथ ललितांबरा पीठाधीश्वर के महंत जयराम महराज व जानकीमहल के महंत सीताशरण महराज ने मेले का शुभारंभ कराया। महंतों ने कहा कि धार्मिक कार्यक्रमों को व्यापक रूप से कराना चाहिए। मन सच्चा हो तो प्रयास में सफलता मिलती है। रामायण मेला की परपंरा को बनाए रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। कहा कि इस मंच में कई विद्वानों का सानिध्य मिलता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ला ने कहा कि सभी को मिलकर जिले के विकास में सहयोग करना चाहिए। साधु संतों के आशीर्वाद से सफलता मिलती है। पहले दिन मंच पर अयोध्या के संत सुखराम दास महराज, भरतमंदिर के महंत दिव्यजीवन दास, साहब बाबा, शिवराम दास महराज के अलावा पूर्व सांसद भैरो प्रसादमिश्र, राजाबाबू, शिवकुमार, सत्येंद्र, आशीष, प्रिंस करवरिया व सुभाष आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन चंद्रिका प्रसाद ललित व करुणा शंकर द्विवेदी ने किया।
संचालकों ने बताया कि समतामूलक समाज की संरचना व भरतीय संस्कृति के संवर्द्धन के लिए वर्ष 1960 में रामायण मेला आयोजन की परिकल्पना समाजवादी चिंतक डा राममनोहर लोहिया ने चित्रकूट में की थी। उनके द्वारा प्रस्तुत योजना अनुसार वर्ष 1973 से रामायण मेले का शुभारंभ हुआ। तभी से प्रतिवर्ष नए कलेवर के साथ आयोजित हो रहा है। 49वां समारोह 10 अप्रैल से 14 अप्रैल तक चलेगा। रामायण मेला में प्रतिभाग करने को रामकथा के अधिकारी, विद्वान, ख्यातिलब्ध कथा व्यास, उच्च स्तरीय सांस्कृतिक दल, कलाकार आ रहे हैं। प्रात: व शाम को वृंदावन की रास मंडली रामलीला और कृष्णलीला का मंचन करेंगी।
धर्मनगरी में राष्ट्रीय रामायणमेले का दीप जलाकर शुभांरभ करते महंत बद्री प्रपन्नाचार्य व साथ में - फोटो : CHITRAKOOT