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पहाड़ के पानी को संचित कर होती खेती

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मानिकपुर (चित्रकूट)। पहाड़ों से गिरे पानी को तालाबों में इकट्ठा कर सिंचाई के लिए प्रयोग में लाया जाएगा। महोबा से आए प्रगतिशील किसानों के दल ने पाटिन व जगन्नाथपुरम गांव में पूरी प्रक्रिया को देखा। इसी तालाब के माध्यम से आस पास के गांव के किसानों द्वारा सिंचाई कार्य किया जा रहा है।
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सृजन सोसायटी संस्थान कानपुर के जलागम प्रकल्प के अंतर्गत प्रगतिशील किसानों का दल चित्रकूट जनपद के मानिकपुर पहुंचा। जिसमें हमीरपुर जिले के सुमेरपुर ब्लाक अंतर्गत चंदपुरुवा एवम कुंडोर ग्राम के जलागम विकास समिति के सदस्य व प्रगतिशील किसान शामिल हैं। इस दल ने अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान द्वारा पाटिन व जगन्नाथपुरम में श्रमदान से बने तालाब के कार्य को देखा। संस्थान के विजय सिंह व रामबालक ने बताया गया कि पहाड़ों से पानी बहकर तालाब में एकत्र होता है। जिससे कृषि कार्य किया जा रहा है। टिकारिया गांव में सृजन संस्थान के सहयोग से मियांवा की पद्धति से तैयार तपोवन को भी देखा। उनको इस पद्धति के बारे में बताया गया छोटे से बड़े पौधों को लगाया गया है बताया कि इस पद्धति में सभी वृक्ष जीवित रहेंगे।
ग्राम बढ़ईया में दोहा मॉडल एवं प्राकृतिक केंद्र को देखा। बताया गया कि दोहा माडल पद्धति में बारिश में नालों से पानी भर कर निकल जाता था और बारिश जाने के बाद पानी नहीं बचता था परंतु दोहा मॉडल के द्वारा नाले में गड्ढे करके पानी को एकत्र किया जाता है और इसी पानी का उपयोग वहां के किसान खेतों में सिंचाई के लिए करते हैं। वहां के किसानों ने आए हुए सदस्यों को प्राकृतिक विधि से कर रहे धान की खेती को दिखाया। संस्थान के सचिव जेपी सिंह, जलागम प्रकल्प के समन्वयक रजनीश चतुर्वेदी, रामखिलावन, सुभाष, विश्वदीप, शुभम, गजेंद्र, नरेंद्र, विजय आदि मौजूद रहे।
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