फोटो-06 सीकेटीपी 10-गली में संचालित होटल। संवाद
चित्रकूट। धर्मनगरी में वर्ष भर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ रहती है। रामघाट, कामदगिरि और अन्य धार्मिक स्थलों पर प्रतिदिन हजारों लोग पहुंचते हैं। यात्रियों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में होटल, धर्मशालाएं और रेस्तरां संचालित हैं। एक चिंताजनक पहलू यह है कि इनमें से कई प्रतिष्ठान गलियों और तंग रास्तों में हैं जहां आपात स्थिति में दमकल की गाड़ियां भी आसानी से नहीं पहुंच पाएंगी।
रामघाट क्षेत्र में दर्जनों होटल, धर्मशालाएं और भोजनालय घनी आबादी और तंग गलियों में हैं। कई जगहों पर रास्ते इतने संकरे हैं कि दोपहिया वाहन निकालना भी मुश्किल हो जाता है। यदि किसी भवन में आग लग जाए तो जान जोखिम में पड़ सकती है। रामघाट क्षेत्र के अधिकांश होटलों, रेस्तराओं और धर्मशालाओं के पास अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं है। कई भवनों में अग्निशमन यंत्रों की व्यवस्था भी केवल खानापूर्ति तक सीमित है। कुछ जगहों पर आपातकालीन निकास द्वार तक नहीं बनाए गए हैं।
स्थानीय राम कुमार व सुरेश का कहना है कि गलियों में होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं लेकिन सुरक्षा मानकों की जांच और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती।
बोले जिम्मेदार-
अपर जिलाधिकारी चंद्रशेखर ने कहा कि होटलों और रेस्तराओं की जांच की जा रही है और फायर एनओसी न होने पर कार्रवाई भी की जा रही है।
फोटो-06 सीकेटीपी 10-गली में संचालित होटल। संवाद