चित्रकूट। जिला अस्पताल में प्रसूताओं की जिंदगी बचाने के लिए सोमवार को आखिरकार दो महिला चिकित्सकों की अस्थायी तौर पर तैनाती की गई। आपरेशन की स्थिति वाली प्रसूताओं को भर्ती नहीं किया गया। ऐसी तीन प्रसूताओं को रेफर किया गया। एक महिला का सामान्य प्रसव हुआ।
इससे पूर्व रविवार को दिन में चार और फिर रात में चार प्रसव डॉक्टरों की मौजूदगी के बिना कराए गए थे। यहां अक्सर ही नर्स और आया प्रसव कराती थीं। शनिवार को इसी तरह के एक मामले में प्रसूता रोशनी मिश्रा की मौत हो चुकी है। अमर उजाला ने सोमवार के अंक में डॉक्टरों की मौजूदगी के बिना प्रसव कराने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की तो जिले के अफसरों ने इस पर अंकुश लगाया और महिला चिकित्सकों की तैनाती की। जिला अस्पताल के सीएमएस डा. राजेश खरे ने बताया कि जच्चा बच्चा वार्ड के लिए डा. रत्ना द्विवेदी व डा. सुकृति सिंह को अस्थायी तौर पर तैनात किया है। इन्होंने भर्ती प्रसूताओं व जच्चा बच्चा का हाल जानकर शिफ्टवार इलाज किया। एक महिला डाक्टर की रात में भी तैनाती की गई है, लेकिन निर्देश हैं कि प्रसूताओं का आपरेशन नहीं होगा। सिर्फ सामान्य प्रसव वाले केस ही लिए जाएंगे।
जिला अस्पताल में प्रसूति रोग के दो डाक्टरों की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। मऊ व मानिकपुर में ऐसी महिला चिकित्सक हैं, लेकिन सीएमओ के आदेश के बिना वह जिला अस्पताल में मरीज देखने नहीं आ सकती हैं।
वर्जन
जिला अस्पताल से महिला डाक्टरों की मांग का पत्र आया है। जल्द ही शासन को लिखा जाएगा। इस बीच जिले में ही मौजूद डाक्टरों की मदद ली जाएगी। महिला की मौत व डाक्टर की लापरवाही के आरोप की जांच के लिए टीम गठित की गई है, लेकिन सोमवार को जांच आगे नहीं बढ़ सकी।
डा. भूपेश द्विवेदी, सीएमओ
अभी नहीं लौटी विशेषज्ञ डाक्टर
जिला अस्पताल में जच्चा बच्चा वार्ड में प्रसूति रोग विशेषज्ञ डा. रफीक अंसारी व डा. ऊषा की तैनाती है। डा. रफीक की शनिवार की रात को ड्यूटी नहीं थी और डा. ऊषा लगातार गैरहाजिर चल रही हैं। इस संबंध में सीएमएस ने बताया कि डा. ऊषा तीन दिन से अवकाश पर हैं। सोमवार को उनका कोर्ट में बयान है, जिसके लिए अवकाश लिए हैं।
एक और रोशनी पर आया संकट, नवजात की मौत
चित्रकूट। जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का एक और नजारा सामने आया। रविवार की देर रात को शीतलपुर तराैंहा की रोशनी पत्नी हरिशचंद्र को तेज प्रसव पीड़ा हुई। परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। डाक्टर न होने की वजह से नर्स ने उन्हें रेफर कर दिया। हालत गंभीर होने पर मजबूरी में परिजनों ने उन्हें जिला अस्पताल के पास ही एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। उनका कहना था कि प्रयागराज या बांदा ले जाने में दो से तीन घंटे लगेंगे और इतना समय नहीं है। प्राइवेट अस्पताल में रोशनी ने बच्ची को जन्म दिया।
सोेमवार सुबह नवजात की हालत बिगड़ी तो प्राइवेट अस्पताल से उसे रेफर कर दिया गया। परिजन नवजात को लेकर फिर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां उसका इलाज शुरू हुआ। शाम को नवजात की हालत नाजुक होने पर डा. नितिन ने उसे रेफर कर दिया। परिजन बच्ची को लेकर सतना पहुंचे, लेकिन इसी बीच उसकी मौत हो गई।
डीएम व सीएमओ को सौंपा ज्ञापन
चित्रकूट। अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद के जिलाध्यक्ष की अगुवाई में पदाधिकारियों ने डीएम व सीएमओ को पत्र सौंपकर प्रसूता की मौत के मामले को लेकर संबंधित डाक्टर व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। जिलाध्यक्ष ब्रजगोपाल त्रिपाठी ने बताया कि 15 अप्रैल को बल्दाऊगंज निवासी रोशनी मिश्रा की मौत डॉक्टर न होने की वजह से हुई। इलाज में लापरवाही की गई। घटना से समाज में रोष व्याप्त है। आरोप लगाया कि जिला अस्पताल रेफरल सेंटर बना है। अधिकारी व कर्मचारी शासन की साख पर बट्टा लगा रहे हैं। इस मौके पर पीड़ित रामनरेश मिश्रा, बृजेश त्रिपाठी, अनिल द्विवेदी, राजू करवरिया, देवकीनंदन, सत्यप्रकाश, अजय शुला, बालकृष्ण, पंकज मिश्रा, अनिल शुक्ला, आलोक पाठक, अनुज हनुमत, अभय कुमार, चन्द्र कुमार आदि मौजूद रहे।