चित्रकूट। तीर्थ नगरी के युवाओं के लिए पलायन का दौर अब खत्म होने वाला है।
शासन की स्वीकृत महायोजना-2031 में व्यावसायिक भूमि को 56 हेक्टेयर से बढ़ाकर 183 हेक्टेयर कर दिया गया है। 127 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन पर अब व्यापार, टाउनशिप और पर्यटन सुविधाएं विकसित होंगी, जिसका सीधा लाभ युवाओं को मिलेगा।
अभी तक युवा नौकरी के लिए प्रयागराज, कानपुर या इंदौर जाते हैं। दुकानदारों के पास विस्तार के लिए जमीन नहीं है। महायोजना ने यह कमी दूर कर दी है। प्राधिकरण के अनुसार बढ़ी जमीन का उपयोग दो बड़े प्रोजेक्ट में होगा। पहला है इंटीग्रेटेड टाउनशिप।
कर्वी, देवांगना, पहाड़ी और भरतकूप मार्ग पर नया टाउनशिप बसेगा। नीचे दुकानें, शोरूम, मॉल और ऊपर आवास होंगे। यहां सेल्समैन, कैशियर, अकाउंटेंट, मैनेजर, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर और सिक्योरिटी गार्ड के हजारों पद निकलेंगे।
एक अनुमान के मुताबिक सिर्फ टाउनशिप से ही 10 हजार से ज्यादा प्रत्यक्ष नौकरियां मिलेंगी। राजमिस्त्री, बढ़ई और वेल्डिंग कारीगरों को भी साल भर काम मिलेगा। दूसरा बड़ा फायदा पर्यटन हब से होगा। रामघाट, कामदगिरि और हनुमान धारा के आसपास रिवर फ्रंट मार्केट, फूड कोर्ट, बजट होटल और पार्किंग विकसित होगी। इससे नाविक, ऑटो चालक, प्रसाद विक्रेता, गाइड, फोटोग्राफर और होटल स्टाफ की आमदनी दोगुनी होगी।
इसके अलावा महिला समूहों के स्थानीय उत्पादों के लिए भी स्टॉल आरक्षित होंगे। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे ने चित्रकूट को बाजार से जोड़ा था, महायोजना ने रोजगार से जोड़ दिया है। अगले पांच साल में 25 हजार से ज्यादा युवाओं को घर में ही रोजगार मिलने का दावा है।
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वर्जन
अगले दस वर्ष की संभावनाओं को देखते हुए महायोजना-2031 में व्यावसायिक क्षेत्र के दायरे में वृद्धि की गई है। इससे नई व्यावसायिक इमारतें बनेंगी, साथ ही युवाओं को रोजगार के अवसर भी सुलभ होंगे। - पुलकित गर्ग, जिलाधिकारी